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Satna News: किसान अंशुमान सिंह लोकल 18 को बताते हैं कि इंटरक्रॉपिंग का मतलब एक ही खेत में मुख्य फसल के साथ सहायक फसलों को उगाना है. अक्सर देखने को मिलता है कि गेहूं या सरसों की बोवनी के बाद खेत में कुछ जगह खाली रह जाती है या मेड़ों पर खरपतवार उग आती है.
सतना. जनवरी का महीना रबी सीजन के बीच का ऐसा समय होता है, जब सही कृषि तकनीक अपनाकर किसान अपनी आमदनी को दोगुना करने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं. इंटरक्रॉपिंग ऐसी ही एक आधुनिक और लाभकारी तकनीक है, जो कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने की क्षमता रखती है. अगर किसान इस समय समझदारी से फसलों का चयन करें और खेत की खाली जगह का सही उपयोग करें, तो कुछ ही महीनों में अतिरिक्त आमदनी का मजबूत स्रोत तैयार हो सकता है. खास बात यह है कि इंटरक्रॉपिंग न केवल आर्थिक लाभ देती है बल्कि मिट्टी की सेहत और मुख्य फसल की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाती है.
लोकल 18 से बातचीत में मध्य प्रदेश के सतना के किसान अंशुमान सिंह बताते हैं कि इंटरक्रॉपिंग का मतलब एक ही खेत में मुख्य फसल के साथ सहायक फसलों को उगाना है. अक्सर देखा जाता है कि गेहूं या सरसों की बोवनी के बाद खेत में कुछ स्थान खाली रह जाते हैं या मेड़ों पर खरपतवार उग आती है. यह खरपतवार मुख्य फसल के पोषक तत्वों को सोख लेती है, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है. इंटरक्रॉपिंग अपनाने से न सिर्फ इन खाली जगहों का सही उपयोग होता है बल्कि खरपतवार पर भी प्राकृतिक रूप से नियंत्रण पाया जा सकता है.
पालक और मेथी का बेहतरीन विकल्प
इस समय रबी फसलों के साथ हरी पत्तेदार सब्जियों की इंटरक्रॉपिंग सबसे कारगर मानी जा रही है. गेहूं या सरसों के साथ पालक और मेथी लगाने से किसानों को कई स्तरों पर फायदा मिलता है. ये सब्जियां तेजी से बढ़ती हैं और 3 से 4 हफ्तों में कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं. इससे किसान को मुख्य फसल की कटाई से पहले ही बाजार में बेचने के लिए ताजा उपज मिल जाती है, जो तुरंत नकद आमदनी का जरिया बनती है.
निराई-गुड़ाई से राहत और बेहतर उत्पादन
पालक और मेथी की एक बड़ी खासियत यह है कि इनकी कटाई के दौरान खेत की ऊपरी मिट्टी हल्की सी उलट-पुलट हो जाती है. इससे मिट्टी में हवा का संचार बढ़ता है और गेहूं या सरसों की जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन और नाइट्रोजन मिलती है. नतीजतन मुख्य फसल की पौध मजबूत होती है और बीमारी के चांस कम होते हैं, जिससे उत्पादन में बढ़ोतरी देखने को मिलती है. साथ ही किसानों को बार-बार निराई-गुड़ाई से भी राहत मिलती है, जिससे श्रम और लागत दोनों कम होती है.
बाजार की मांग का फायदा
हरी पत्तेदार सब्जियां मिट्टी में जैविक गतिविधियों को बढ़ाती हैं और नाइट्रोजन संतुलन सुधारने में मदद करती हैं. इससे आने वाली फसलों के लिए भी खेत अधिक उपजाऊ बनता है. वहीं सर्दियों के मौसम में पालक और मेथी की बाजार में अच्छी मांग रहती है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिल सकते हैं. यही कारण है कि इंटरक्रॉपिंग को कम जोखिम और स्थायी मुनाफे वाली खेती माना जा रहा है.
इन फसलों को भी कर सकते हैं शामिल
विशेषज्ञों के अनुसार, किसान गेहूं की फसल में सरसों, मटर और चने की भी इंटरक्रॉपिंग कर सकते हैं. ये फसलें एक-दूसरे के पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा नहीं करतीं और संतुलित रूप से बढ़ती हैं. कुल मिलाकर जनवरी में सही योजना और फसल चयन के साथ की गई इंटरक्रॉपिंग किसानों के लिए कम समय में अधिक आमदनी और बेहतर उत्पादन का मजबूत विकल्प बन सकती है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.