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Sidhi News: अजोध्या प्रसाद पाल ने लोकल 18 से कहा कि हर साल लगभग 25 भेड़ों के बच्चे बिक जाते हैं, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी हो जाती है. खास बात यह है कि उन्हें भेड़ बेचने के लिए मंडी नहीं जाना पड़ता है क्योंकि खरीदार खुद उनके घर तक पहुंच जाते हैं.
सीधी. मध्य प्रदेश के सीधी जिले में भेड़पालन ग्रामीण किसानों के लिए आय का एक मजबूत साधन बनकर उभरा है. चुरहट क्षेत्र के किसान अजोध्या प्रसाद पाल पिछले करीब 50 सालों से भेड़ पालन कर रहे हैं और इससे अच्छी खासी आमदनी अर्जित कर रहे हैं. उनकी मेहनत और अनुभव आज कई किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं. अजोध्या प्रसाद ने भेड़पालन की शुरुआत बेहद छोटे स्तर से की थी. उन्होंने केवल एक देसी नस्ल की भेड़ से अपना काम शुरू किया और समय के साथ इसे एक लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया. आज उनके पास लगभग 70 देसी नस्ल की भेड़ें हैं, जो उनकी नियमित आय का मुख्य जरिया हैं.
सीधी जिला पशु चिकित्सालय के पशु चिकित्सक डॉ सलिल कुमार पाठक ने लोकल 18 को बताया कि भेड़ों के लिए खुली, साफ और हवादार जगह होना बेहद जरूरी है. दिन में उन्हें चरने के लिए बाहर ले जाया जाता है और शाम को सुरक्षित बाड़े में बांध दिया जाता है. साफ पानी की उपलब्धता हर समय जरूरी मानी जाती है. सर्दियों के मौसम में भेड़ों को ठंडी हवा से बचाने पर विशेष ध्यान दिया जाता है. रात के समय बाड़े को ढक दिया जाता है और पराली का सूखा बिछावन दिया जाता है ताकि भेड़ें ठंड से सुरक्षित रहें. खासकर छोटे मेमनों की देखभाल पर ज्यादा ध्यान देना जरूरी होता है.
अच्छी देखभाल से बढ़ता है वजन
अजोध्या बताते हैं कि आमतौर पर 12 महीने में भेड़ या उसका बच्चा बेचने लायक हो जाता है. अच्छी देखभाल से वजन बढ़ता है और बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं. एक अच्छी देसी भेड़ 7 से 8 हजार रुपये तक बिक जाती है. हर 6 महीने में 15 से 20 भेड़ बेच लेते हैं, जिससे सालभर नियमित आमदनी बनी रहती है. यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भेड़पालन किसानों के लिए एक भरोसेमंद और लाभकारी व्यवसाय बनता जा रहा है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.