Rivers in Rewa: रीवा की आत्मा कही जाती हैं ये तीन नदियां, जहां प्रयागराज के संगम की तरह होता है त्रिवेणी मिलन

Rivers in Rewa: रीवा की आत्मा कही जाती हैं ये तीन नदियां, जहां प्रयागराज के संगम की तरह होता है त्रिवेणी मिलन


विंध्य क्षेत्र की प्राकृतिक पहचान और जीवनधारा मानी जाने वाली नदियों से जुड़ा मध्य प्रदेश का रीवा अपने आप में बेहद खास है. हरियाली, वन्यजीव और मानव जीवन को संजीवनी देने वाली बीहर, बिछिया और सोन नदियां इस क्षेत्र की आत्मा कही जाती है. इन्हीं नदियों के सहारे यहां की खेती, जल आपूर्ति और बिजली उत्पादन संभव हो पाता है. पहाड़ों, घाटियों और संगमों से सजा रीवा न सिर्फ प्राकृतिक रूप से समृद्ध है, बल्कि ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. तीन नदियों के मिलन से बना राजघाट का त्रिवेणी संगम रीवा की सुंदरता को अलग पहचान देता है. जहां प्रकृति, आस्था और संस्कृति एक साथ दिखाई देती है.

रीवा के पर्यावरणविद डाॅ. मुकेश एंगल बताते है कि विंध्य क्षेत्र की तीन नदियों को जीवनदायिनी कहा जाता है. बीहर, बिछिया और सोन को ये नदियां ही है जो विंध्य क्षेत्र को प्राकृतिक रूप से परिपूर्ण बनाती है. विंध्य क्षेत्र की हरियाली, पशु, पंछी और मानव जीवन को जीवन देने का काम करती है ये नदियां. इन्हीं नदियों के जल का उपयोग किसान नहरों के जरिए सिंचाई के लिए करते है. बिजली उत्पादन के लिए भी किया जाता है.

प्राकृतिक संपदा से भरपूर मध्य प्रदेश का रीवा अपने आप में बेहद खास है. रीवा विंध्य क्षेत्र के सबसे प्रसिद्ध और खूबसूरत शहर में से एक है. यही वजह है कि रीवा पर्यटकों की पसंद बना हुआ है. तीन नदियों के संगम के किनारे बसा रीवा का राज महल बेहद आकर्षक दृश्य पेश करता है.

रीवा की बीहर और बिछिया नदियां मिलकर, रीवा के राजघाट पर सोन नदी जो कि नर्मदा की सहायक नदी है में मिलती है और यह त्रिवेणी संगम बनता है. इसके बाद यह संयुक्त जलधारा सोन नदी के रूप में आगे बढ़ती है फिर टोंस और बेलन नदी में मिलने के बाद अंततः गंगा नदी में मिल जाती है, जो आगे चलकर बंगाल की खाड़ी में विलीन होती है.

रीवा में बिछिया और बीहर नदी का संगम सोन नदी के साथ मिलकर एक बेहद खूबसूरत त्रिवेणी संगम बनाता है. जो रीवा के राजघाट पर स्थित है और एक प्रमुख धार्मिक व पर्यटन स्थल है. बिछिया नदी, रीवा शहर के पास से बहते हुए, बीहर नदी में मिलती है और यह संगम क्षेत्र की जीवन रेखा माना जाता है. जो ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण है.

रीवा में बहने वाली बीहर, बिछिया और सोन नदी में राजघाट सबसे सुंदर है. इस घाट का पानी बेहद स्वच्छ है. रोजाना लोग नदी में नहाने के लिए सुबह से ही पहुंचने लगते है. लोगों का कहना है कि ठंडी के दिनों में भी सुबह-सुबह नदी का पानी गर्म रहता है. बीहर नदी रीवा पठार से उतरते समय गहरी घाटियां यानि बीहड़ बनाती थी. जिससे इसका नाम ‘बीहर’ पड़ा. यह बिछिया नदी और टोंस (तमसा) नदी की एक महत्वपूर्ण सहायक नदी है और रीवा के जल-तंत्र का हिस्सा है.

ऐसी ही रीवा की दूसरी नदी है बिछिया इसका नाम भी समय के साथ, इस नदी को स्थानीय रूप से ‘बिछिया’ कहा जाने लगा. हालांकि सोन और बीहर नदी में मिलने के बाद गहरे रास्तों और स्थानीय इतिहास से नदियों का नाम जुड़ा होता है.



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