ग्राउंड रिपोर्ट: 100 km दूर इंदौर की प्यास बुझाने वाली नर्मदा का आंचल खरगोन में मैला! नदी में सीधे गिर रहा नाला

ग्राउंड रिपोर्ट: 100 km दूर इंदौर की प्यास बुझाने वाली नर्मदा का आंचल खरगोन में मैला! नदी में सीधे गिर रहा नाला


Khargone News: देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में प्रशासन की लापरवाही के कारण बीते दिनों दूषित पानी पीने से करीब 18 लोगों की मौत हो गई. कई लोग बीमार होकर अस्पताल में भर्ती हैं. इस घटना ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया. लेकिन, जानकर हैरानी होगी कि इंदौर के लाखों लोगों की प्यास जिस नर्मदा जल से बुझती है, वो पानी 100 किलोमीटर दूर खरगोन जिले से पहुंचता है. जी हां, नर्मदा नदी जिसे मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी कहा जाता है, जो करोड़ों लोगों की प्यास बुझाती है, खेतों की सिंचाई, उद्योगों और वन्य जीवों के जीवन का आधार है.

खरगोन सहित नर्मदा के दोनों तटों से लगे हजारों गांवों और शहरों के लोग इसी नदी पर निर्भर है. वहीं, खरगोन की धार्मिक नगरी मंडलेश्वर के समीप जलुद क्षेत्र से ही नर्मदा का पानी 6 पंपिंग स्टेशनों से लिफ्ट होकर इंदौर पहुंचता है. प्रत्येक पंपिंग स्टेशन पर पानी को फिल्टर भी किया जाता है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि जिस नर्मदा का पानी करोड़ों लोग पी रहे हैं. इंदौर के लोगों तक पहुंच रहा है. वह नर्मदा खरगोन में कितनी साफ और स्वच्छ है? स्थानीय प्रशासन ने नर्मदा को स्वच्छ बनाए रखने के लिए क्या प्रयास किए हैं? जानें

ग्राउंड जीरो पर local18 की टीम
जमीनी हकीकत जानने के लिए लोकल18 की टीम मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर ग्राउंड जीरो पर पहुंची. पड़ताल में सामने आया कि धार्मिक नगर मंडलेश्वर, जो नर्मदा के तट पर बसा है. वहीं पर नर्मदा का जल दूषित हो रहा है. खास बात ये कि इसी शहर से कुछ दूरी पर जलुद क्षेत्र से इंदौर को पानी सप्लाई होता है. नर्मदा के तटों पर टीम ने पाया कि शहर से निकलने वाला गंदा पानी नालियों के जरिए बड़े नालों में जाता है और ये नाले सीधे नर्मदा नदी में मिल रहे हैं, यानी घरेलू गंदा पानी और सीवेज बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे नर्मदा में पहुंच रहा है.

बड़े-बड़े नालों से नर्मदा में मिल रहा गंदा पानी
पड़ताल के दौरान नर्मदा से जुड़े करीब चार बड़े नाले और कई छोटी नालियां सामने आईं, जो लगातार नदी को प्रदूषित कर रही हैं. हैरानी की बात यह कि इसी घाट पर देशभर से श्रद्धालु स्नान, पूजा और धार्मिक अनुष्ठान के लिए पहुंचते हैं. जब वे नर्मदा में गंदा पानी मिलते हुए देखते हैं, तो उनकी आस्था को गहरी ठेस पहुंचती है. यहां नर्मदा जल ही नहीं तटों की स्थिति भी अच्छी नहीं है. कई जगहों पर पूजन सामग्री, गंदे कपड़े, प्लास्टिक और पॉलीथिन फैली हुई नजर आई. नियमित सफाई की व्यवस्था कहीं-कहीं ही दिखाई देती है. नालों के पानी को रोकने या मोड़ने के लिए भी कोई ठोस इंतजाम मौके पर नजर नहीं आया.

गंदगी पर क्या बोले स्थानीय लोग
स्थानीय निवासी राजेंद्र केवट बताते हैं कि नर्मदा की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है. शहर का सारा गंदा पानी, जिसमें शौचालयों का पानी भी शामिल है, सीधे नर्मदा में मिल रहा है. प्रशासन की ओर से न तो नियमित सफाई होती है और न ही नालों के पानी को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए गए हैं. इसका असर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों दोनों की आस्था और स्वास्थ्य पर पड़ रहा है. नालों का पानी तो नर्मदा में मिल रहा है, साथ ही साबुन, सर्फ, शैंपू के इस्तेमाल पर भी कोई रोक नहीं है.

गंदा पानी रोकने प्रशासन का मास्टर प्लान
वहीं, इस मामले में जब नगर पालिका मंडलेश्वर के सीएमओ संजय रावल से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि शहर के गंदे पानी को नर्मदा में मिलने से रोकने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की योजना पर काम चल रहा है. उन्होंने कहा कि करीब 75 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और शेष कार्य को जल्द पूरा कराने के लिए निर्माण एजेंसी पर दबाव बनाया जा रहा है. अनुमान है कि अगले दो से तीन महीनों में यह परियोजना पूरी हो जाएगी, जिसके बाद नर्मदा में सीधे गंदा पानी जाने से रोका जा सकेगा. सीएमओ ने यह भी बताया कि नर्मदा घाट और तट की सफाई के लिए दो कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है, जो नियमित रूप से सफाई का काम कर रहे हैं.



Source link