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Drip Sprinkler Irrigation Subsidy: सिंचाई की आधुनिक तकनीकें अब किसानों के लिए जरूरत बन चुकी हैं. स्प्रिंकलर और ड्रिप सिस्टम न केवल पानी की खपत कम करते हैं बल्कि फसल की जड़ों तक सही मात्रा में नमी पहुंचाकर उत्पादन बढ़ाने में भी मदद करते हैं. सतना जिले में उद्यानिकी विभाग इन प्रणालियों पर अनुदान देकर किसानों को तकनीकी खेती की ओर प्रोत्साहित कर रहा है.
शिवांक द्विविद, सतना: खेती आज केवल मेहनत का काम नहीं रह गई है बल्कि सही तकनीक और संसाधनों के इस्तेमाल का खेल बन चुकी है. बदलते मौसम, घटते भूजल स्तर और बढ़ती खेती लागत ने किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिंचाई की खड़ी कर दी है. परंपरागत नहर, क्यारी या बाढ़ सिंचाई जैसी विधियां अब न तो पानी की बचत कर पा रही हैं और न ही फसल को समान रूप से पानी उपलब्ध करा पा रही हैं. इसी कारण अब आधुनिक सिंचाई तकनीकों की ओर किसानों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है. स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई प्रणाली ऐसी ही तकनीकें हैं जो कम पानी में बेहतर उत्पादन का भरोसा देती हैं. खास बात यह है कि सरकार इन तकनीकों को अपनाने के लिए किसानों को अनुदान भी दे रही है जिससे लागत का बोझ काफी हद तक कम हो जाता है.
सतना में जनवरी से मार्च तक मौका, खाली है कई वर्गों का टारगेट
लोकल 18 से बातचीत में सोहावल विकासखंड की उद्यान विकास अधिकारी सुधा पटेल ने बताया कि उद्यानिकी विभाग में वित्तीय वर्ष अप्रैल से मार्च तक माना जाता है. 2025-26 के लिए अब केवल तीन महीने यानी जनवरी, फरवरी और मार्च ही शेष बचे हैं. इस अवधि में सतना जिले में स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई प्रणाली पर अनुदान दिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि वर्तमान में पोर्टेबल स्प्रिंकलर में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए टारगेट खाली है जबकि ड्रिप सिंचाई के लिए सभी वर्गों में लक्ष्य शेष है. इसका मतलब है कि किसान बिना ज्यादा प्रतिस्पर्धा के इस योजना का लाभ उठा सकते हैं.
बगीचे और आर्चेट फसलों के लिए ड्रिप सबसे बेहतर विकल्प
अधिकारी के अनुसार जिन किसानों ने आर्चेट लगाए हैं या जिनके पास फलदार पौधों का बगीचा है उनके लिए ड्रिप सिंचाई प्रणाली सबसे उपयुक्त है. ड्रिप सिस्टम के माध्यम से पौधों की जड़ों तक बूंद-बूंद पानी पहुंचता है जिससे नमी लंबे समय तक बनी रहती है और पानी की बर्बादी नहीं होती. इसके साथ ही फर्टिगेशन की सुविधा भी मिलती है यानी खाद और पानी एक साथ पूरे खेत या बगीचे में समान रूप से पहुंच जाता है. इससे अलग-अलग पौधों को खाद देने की जरूरत नहीं पड़ती और उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर होती है.
कम श्रम, व्यवस्थित खेती और लागत में बचत
ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इसमें श्रम लागत काफी कम हो जाती है. सिंचाई का काम पूरी तरह सिस्टेमेटिक हो जाता है जिससे समय और मेहनत दोनों की बचत होती है. छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह तकनीक खासतौर पर फायदेमंद साबित हो रही है. विभाग के अनुसार जिन किसानों के पास 2 हेक्टेयर यानी लगभग 5 एकड़ से कम जमीन है उन्हें ड्रिप सिस्टम पर करीब 55 प्रतिशत तक अनुदान मिलता है जो लगभग 70 हजार रुपये तक हो सकता है. एक हेक्टेयर में ड्रिप लगाने का खर्च करीब 90 हजार से 1 लाख रुपये तक आता है जिसमें आधे से ज्यादा राशि अनुदान के रूप में वापस मिल जाती है.
आवेदन प्रक्रिया आसान, रजिस्टर्ड कंपनियों से मिलेगा लाभ
अनुदान का लाभ लेने के लिए किसानों को उद्यानिकी विभाग में पंजीकरण कराना होगा. आवेदन के दौरान फोटो, आधार कार्ड, बैंक पासबुक और भूमि से जुड़े आवश्यक दस्तावेज लगाने होते हैं. विभाग से पंजीकृत कंपनियों के माध्यम से ही स्प्रिंकलर या ड्रिप सिस्टम लगाया जाएगा. समय कम है लेकिन मौका बड़ा है ऐसे में किसान अगर अभी पहल करें तो आधुनिक सिंचाई तकनीक अपनाकर अपनी खेती को ज्यादा लाभकारी बना सकते हैं.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें