BCCI vs BCB vs ICC: टी20 वर्ल्ड कप से पहले भारत और बांग्लादेश के बीच विवाद ने इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) की टेंशन को बढ़ा दिया है. तेज गेंदबाज मुस्तफिजूर रहमान को आईपीएल की टीम कोलकाता नाइटराइडर्स से निकाले जाने के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) काफी नाराज हो गया है. यहां तक कि इसमें अब वहां के खेल मंत्रालय ने भी दखल देना शुरू कर दिया. पहले तो उसने अपने देश में आईपीएल के प्रसारण पर रोक लगा दी और अब कह रहा है कि उसके मैच भारत में सुरक्षा चिंताओं के कारण श्रीलंका में होने चाहिए.
लेटर-लेटर खेल रहा बांग्लादेश
आईसीसी ने बीसीबी के पहले पत्र में किए गए मांग को सिरे से खारिज कर दिया और उसे कह दिया है कि अगर वह भारत में नहीं खेलते हैं तो उन्हें हारा हुआ घोषित किया जाएगा और उनके मैचों के पॉइंट्स विपक्षी टीमों के खाते में जोड़ दिए जाएंगे. अब बांग्लादेश ने एक बार फिर गुरुवार (8 जनवरी) को दूसरा पत्र लिखा है और उसमें सुरक्षा का हवाला दिया है. इस बात की पूरी उम्मीद है कि उसकी मांग को आईसीसी एक बार फिर से ठुकरा देगा.
बांग्लादेश हटता है तो क्या होगा?
अगर बांग्लादेश की टीम टूर्नामेंट से हटने का फैसला करती है तो उसके ग्रुप में विपक्षी टीमों को पॉइंट्स मिल जाएंगे. यहां तक कि अगर आईसीसी चाहे तो किसी अन्य टीम को टूर्नामेंट में शामिल भी कर सकती है. हालांकि, यह एक पेचीदा मामला है और कोई नहीं चाहेगा कि बात यहां तक पहुंच जाएग. जय शाह की अगुआई वाली आईसीसी मामले को किसी तरह बात से निपटाने की कोशिश में लगी है.
…तो हाशिए पर चला जाएगा बांग्लादेश?
अगर बांग्लादेश आईसीसी की बात नहीं मानता है तो उसके संबंध न सिर्फ बीसीसीआई बल्कि आईसीसी से भी खराब हो सकते हैं. ऐसे में उसे हाशिए पर डाला जा सकता है. पिछले एक दशक में आईसीसी के आर्थिक खुलासों के अनुसार, भारत ब्रॉडकास्ट राइट्स, स्पॉन्सरशिप और मीडिया मार्केट के जरिए ग्लोबल क्रिकेट रेवेन्यू का 70% से ज्यादा हिस्सा देता है. 2016 और 2023 के बीच बीसीसीआई को कथित तौर पर आईसीसी के कुल रेवेन्यू शेयर का 35% से ज्यादा मिला, जबकि बांग्लादेश जैसे बोर्ड को 4-6% के बीच मिला. बड़ी शेड्यूलिंग, वेन्यू और टूर्नामेंट फॉर्मेट के फैसलों में अक्सर ब्रॉडकास्ट और रेवेन्यू सिक्योरिटी को प्राथमिकता दी जाती है. ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां भारत का दबदबा बेजोड़ है. बांग्लादेश साल 2000 से फुल मेंबर होने के बावजूद काफी पीछे चला जाएगा.
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बांग्लादेश पर क्या असर?
आईसीसी टूर्नामेंट में बांग्लादेश लगातार अपनी काबिलियत के दम पर क्वालिफाई करता रहा है. हालांकि, मैच की टाइमिंग, वेन्यू का बंटवारा और प्राइम ब्रॉडकास्ट स्लॉट में हमेशा ज्यादा कमाई करने वाली टीमों को ही फायदा मिला है. बांग्लादेश के मैच अक्सर कम व्यूअरशिप वाले टाइम पर शेड्यूल किए जाते हैं, जिसका सीधा असर स्पॉन्सर की वैल्यू और ग्लोबल पहचान पर पड़ता है.
पाकिस्तान से सीखे ले बांग्लादेश
अगर बांग्लादेश को अपनी हालत खराब नहीं करनी है तो उसे पाकिस्तान जैसी गलती नहीं करनी चाहिए. पाकिस्तान का अकेलापन एक चेतावनी जैसा है. 2013 से इस देश ने भारत में कोई भी बाइलेटरल सीरीज नहीं खेली. कुछ आईसीसी टूर्नामेंट के मैचों के लिए उसकी टीम भारत आई है. अब तो यह भी हाइब्रिड मॉडल पर होने लगा है. भारत और पाकिस्तान दोनों एक-दूसरे की जमीन पर नहीं खेलते हैं. इस बार भी टी20 वर्ल्ड कप में दोनों देशों का मुकाबला श्रीलंका में खेला जाएगा. पाकिस्तान को आईसीसी से बाहर नहीं निकाला गया, बल्कि उसे किनारे कर दिया गया है. उसने करीब 2 दशक के बाद इस बार किसी आईसीसी टूर्नामेंट की मेजबानी की. फरवरी-मार्च में पाकिस्तान ने चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन किया. इसमें भी उसे ज्यादा फायदा नहीं हुआ, क्योंकि भारत वहां खेलने ही नहीं गया. उसके सारे मैच दुबई में हुए थे. अगर बांग्लादेश के साथ भी कुछ ऐसा होने लगे तो वह क्रिकेट जगत में काफी किनारे हो जाएगा.
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बांग्लादेश के लिए हाशिए पर जाने का क्या मतलब होगा?
अगर तनाव बना रहता है, तो इसका असर साफ दिखेगा. एक आईसीसी टूर्नामेंट साइकिल BCB के सालाना रेवेन्यू का 25-30% होता है. मैदान पर कम दिखना सीधे तौर पर स्पॉन्सरशिप रिन्यूअल पर असर डालती है. कम दबाव वाले मैच खिलाड़ियों के विकास पर असर डालते हैं. बांग्लादेश में क्रिकेट बहुत ज्यादा राष्ट्रवादी है. दूसरे दर्जे के व्यवहार की कोई भी धारणा बीसीबी नेतृत्व के लिए घरेलू राजनीतिक परिणाम ला सकती है. ऐसे में बीसीबी में ही आपसी लड़ाई देखने को मिल सकती है. आधुनिक क्रिकेट में हाशिए पर जाना बहिष्कार से नहीं होता. यह शेड्यूलिंग, रेवेन्यू और निर्णयों से होता है. आईसीसी के लिए चुनौती विश्वसनीयता है. बांग्लादेश के लिए चुनौती एक ऐसे सिस्टम में प्रासंगिकता बनाए रखना है जो तेजी से अर्थशास्त्र द्वारा संचालित हो रहा है.