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Animal Care Tips: पशु स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर आरपी परौहा के मुताबिक बरसात, सर्दी और गर्मी के मौसम में पशुओं में जूं, किलनी की समस्या बढ़ जाती है. ये परजीवी पशुओं का खून चूसकर उन्हें कमजोर बना देते हैं. समय पर इलाज जरूरी है. नीम तेल, नीम पत्ती और राख जैसे देसी उपाय असरदार हैं. साथ ही साफ-सफाई और नियमित देखभाल बेहद जरूरी है.
Animal Care Tips: मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में किसान खेती के साथ-साथ पशुपालन कर अच्छी आमदनी कर रहे हैं. गाय, भैंस, बकरी जैसे पशुओं से दूध, गोबर और अन्य उत्पाद किसानों की आय बढ़ाने में मदद करते हैं. हालांकि बदलते मौसम के साथ पशुओं के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है. खासतौर पर सर्दी और गर्मी के मौसम में पशुओं में चर्म से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ जाती हैं. जूं, चिमक्कन, किलनी जैसे बाहरी परजीवी पशुओं को सबसे अधिक परेशान करते हैं, जिससे उनकी सेहत और उत्पादन दोनों प्रभावित होते हैं.
पशु स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर आरपी परौहा ने बताया कि चर्म रोगों में बाहरी कीड़े पशुओं की त्वचा में प्रवेश कर वहीं अपना घर बना लेते हैं और लगातार खून चूसते रहते हैं. अगर समय रहते इन परजीवियों का इलाज न किया जाए, तो पशु धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है, उसे बुखार आ सकता है और गंभीर स्थिति में जान जाने का खतरा भी बना रहता है. कई बार किसान अंग्रेजी दवाइयों का उपयोग करते हैं, लेकिन सही देखभाल और नियमित देखरेख न होने के कारण समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पाती.
पशुओं में जूं, चिमक्कन, किलनी की समस्या
डॉ. परौहा के अनुसार, यह समस्या ज्यादातर पशुओं की साफ-सफाई और उचित देखभाल न होने की वजह से सामने आती है. पशुओं को गंदे स्थान पर बांधना, नियमित नहलाना न होना और बाड़े की सफाई में लापरवाही इसकी बड़ी वजह है. ऐसे में देसी और सस्ते उपाय किसानों के लिए काफी कारगर साबित हो सकते हैं.
पशुओं के लिए खतरनाक है किलनी
पशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सलिल कुमार पाठक ने बताया कि किसान भाई 10 एमएल नीम के तेल को 1 लीटर पानी में अच्छी तरह मिलाकर किसी साफ कपड़े की मदद से पशु के पूरे शरीर पर लगा सकते हैं. इस दौरान ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि यह मिश्रण पशु की आंखों और नाक में न जाए. दवा लगाने के बाद पशु को किसी कपड़े से ढक देना चाहिए. कुछ ही देर में यह उपाय असर दिखाना शुरू कर देता है. यदि इस प्रक्रिया को दो से तीन सप्ताह में एक बार दोहराया जाए, तो जूं और अन्य छोटे परजीवियों से लंबे समय तक राहत मिल सकती है.
बेहद कारगर हैं ये देसी उपाय
डॉ. आरपी परौहा ने कहा कि जो बड़ी किलनी ज्यादा खून चूसती है, उसे 10 से 20 की संख्या में इकट्ठा कर लें. इसके साथ नीम की पत्तियों को तोड़कर कूट लें और किलनी व नीम का पेस्ट बनाकर पशु के शरीर पर लगा दें. इससे दो से तीन दिनों में किलनी अपने-आप पशु के शरीर से दूर हो जाती है. इसके अलावा नीम की पत्तियों को जलाकर बनी राख को शरीर पर लगाने से भी किलनी से राहत मिलती है. नीम की पत्तियां खिलाने से पेट में मौजूद कीड़े भी खत्म होते हैं.
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विभांशु द्विवेदी मूल रूप से मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के रहने वाले हैं. पत्रकारिता में 5 साल का अनुभव है. इन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय रायपुर से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है. पॉलिटिक…और पढ़ें