खुशबू और स्वाद से भरपूर डुबरी, स्वाद और परंपरा का अनमोल देसी व्यंजन; सर्दियों में होती तैयार

खुशबू और स्वाद से भरपूर डुबरी, स्वाद और परंपरा का अनमोल देसी व्यंजन; सर्दियों में होती तैयार


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Mahua Dubri: कमला पटेल बताती है कि जब वह छोटी थी तब उनकी मां इसको बनाती थी. खाने में उन्हें यह बहुत अच्छी लगती थी. इसलिए बचपन में ही उन्होंने मन से डूबरी बनाना सीख लिया था. इसके बाद शादी हो गई थी और ससुराल भी हमारा जंगल से लगे क्षेत्र में था. तो जब लकड़ी बीनने के लिए जाते थे तो महुआ से फल भी उठा लेते थे. गर्मियों में सूखाते थे. सर्दियों का मौसम आते ही इसे बनाते थे पूरे घर को खिलाते थे. शादी के समय जो सिलसिला शुरू हुआ था आज 35 साल बाद भी वह जारी है.

बुंदेलखंड अपने बुंदेली व्यंजनों के लिए दूर-दूर तक जाना जाता है. कई तरह के ऐसे व्यंजन है जो बुंदेलखंड के अलावा कहीं और नहीं मिलते हैं और अगर मिल भी जाते है तो इस तरह का टेस्ट नहीं मिलता. यहां की महिलाएं खान पान को लेकर अपनी दादी नानी, मां सास से जो परंपरागत तरीके से सिखती आई उसे आज भी निभा रही और वही स्वाद को कायम रखी है. कई तरह की खट्टे मीठे पीके व्यंजन यहां पर बनाए जाते है.

इन्हीं में से एक बुंदेलखंड की डुबरी कोबी खूब पसंद किया जाता है. पहले हर घर में सर्दियों के मौसम में इसको तैयार किया जाता था. लेकिन जैसे-जैसे शहरीकरण हो रहा है बुजुर्ग लोगों का स्वर्गवास हो रहा है तो नई पीढ़ी भी इससे दूर होती जा रही है. लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगहों पर आज भी इस तरह की विलुप्तप्राय हो रहे व्यंजन तैयार किए जाते है. लोगों को चखाए जाते है.

कमला पटेल बताती है कि जब वह छोटी थी तब उनकी मां इसको बनाती थी. खाने में उन्हें यह बहुत अच्छी लगती थी. इसलिए बचपन में ही उन्होंने मन से डूबरी बनाना सीख लिया था. इसके बाद शादी हो गई थी और ससुराल भी हमारा जंगल से लगे क्षेत्र में था. तो जब लकड़ी बीनने के लिए जाते थे तो महुआ से फल भी उठा लेते थे. गर्मियों में सूखाते थे. सर्दियों का मौसम आते ही इसे बनाते थे पूरे घर को खिलाते थे. शादी के समय जो सिलसिला शुरू हुआ था आज 35 साल बाद भी वह जारी है.

कमला पटेल बताती है कि अगर कोई महुआ की डूबरी बनाना चाहता है तो सबसे पहले उसे महुआ के साथ समैया, ड्राई फ्रूट (काजू, किसमिस, बादाम, सूखा नारियल, अचार चिरौंजी, खारक) और गुड़ की जरूरत होती है. इसे बनाने में थोड़ी मेहनत भी करनी पड़ती है और इंतजार भी करना पड़ता है. लेकिन जब यह बनकर तैयार होती है और थाली में इसको परोसा जाता है तो इससे बहुत सुगंधित खुशबू निकलती है और जैसे ही मुंह में जाता है तो लोग इसके दीवाने हो जाते है. बड़े प्यार से लोग खाते है.

अगर कोई डुबरी घर पर बनाना चाहता है तो महुआ को गर्म पानी में उबाले फिर ठंडा होने को रख दें, इसके बाद समैया को गर्म पानी में उबले फिर इसी के साथ में गुड भी डाल दें. जब गुड गोल जाए तो इसमें थोड़ा सा घी ड्राई फूड के साथ में उबले हुए महुआ और सेवइयां डाल दें और करीब 1 घंटे तक इन्हें चूल्हे की आच में पकाने दें. डेढ़ से 2 घंटे में बनकर डूबरी तैयार हो जाती है.

इस देसी व्यंजन को आप घर वालों को मेहमानों को पड़ोसियों को किसी को भी खिला सकते है. खास करके सर्दियों के दिनों में यह काफी फायदेमंद होती है. अगर किसी को सर्दी जुकाम है और उसको सोने से पहले गर्म डुबरी खिला दी जाए तो सुबह इसमें आराम मिलता है. यह स्वाद और स्वास्थ्य दोनों के लिए काफी फायदेमंद भी होती है.

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