Black Tomato Farming: भारत में लाल टमाटर की खेती बेहद आम बात है. लेकिन, विदेशों का काला टमाटर अब भारत में भी उगाया जाने लगा है. दरअसल, मध्य प्रदेश के बैतूल के अनिल वर्मा ने ब्लैक टोमेटो की खेती की है, जिसमें अब फल लगना भी शुरू हो चुके हैं. उन्होंने बताया कि जनवरी काले टमाटर की खेती की शुरुआत के लिए सबसे उपयुक्त महीना है. लोकल 18 ने बालाघाट उद्यानिकी विभाग के उद्यान विस्तार अधिकारी अनिल नखाटे से भी बातचीत की. समझने की कोशिश की अगर आम किसान काले टमाटर की खेती करना चाहता है, तो इसकी शुरुआत कैसे करे. जानें सब…
ऐसे होगी काले टमाटर की खेती
बालाघाट उद्यानिकी विभाग के उद्यान विस्तार अधिकारी अनिल नखाटे बताते हैं कि इसकी खेती में आम टमाटर की तर ही होती है. लेकिन, ये विदेशों से आई किस्म है, इसलिए शुरुआत एक साथ बड़े स्केल पर करने के बजाय छोटे पैमाने पर करें. वहीं, फसल लगाने पर लगातार ध्यान देना चाहिए, जिससे रोग और कीट लगने की शुरुआती स्टेज पर उससे निपटारा किया जाना चाहिए.
काले टमाटर के लिए ऐसी जमीन जरूरी
किसान काले टमाटर की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली जमीन, उपजाऊ दोमट मिट्टी की जरूरत होती है. इसका पीएच 6 से लेकर 7 के बीच होना चाहिए. वहीं, इसकी बुवाई के लिए तापमान 27 से 30 डिग्री होना चाहिए. इसकी खेती के लिए बेहतर समय जनवरी, मार्च और सिंतबर है.
काले टमाटर की बेस्ट किस्में
इसके लिए ब्लैक रोज और ब्लैक क्रीम किस्मों का इस्तेमाल कर सकते हैं. ये मार्केट में आसानी से उपलब्ध हो सकते हैं.
कम से कम रसायन का इस्तेमाल
किसान अगर काले टमाटर की खेती करते हैं, तो उसमें जैविक खाद का ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए. वहीं, अगर रासायनिक खाद का इस्तेमाल करते हैं, तो इसमें मौजूद पोषक तत्व नष्ट नहीं होंगे. ऐसे में ज्यादा से ज्यादा जैविक खाद का इस्तेमाल करना चाहिए.
सिंचाई और खरपतवार का रखें ध्यान
किसान समय पर सिंचाई करें. मिट्टी में नमी बरकरार रखना चाहिए, लेकिन जलभराव की स्थिति न बनने दें. जलभराव की स्थिति बनती है तो रोग और कीट लगने की संभावना भी बनती है. ऐसे में जरूरत के मुताबिक, सिंचाई करें. इसके अलावा किसान खरपतवार नियंत्रण पर खास ध्यान दें, ताकी खरपतवार पौधों को प्रभावित न कर सकें.
पौधों को सहारा देना न भूलें
काले टमाटर के पौधे भी काफी ऊंचे और झाड़ीदार हो जाते हैं. ऐसे में पौधे के गिरने और टूटने से बचाने के लिए बांस की छड़ी का इस्तेमाल कर सकते हैं. इस प्रक्रिया को स्टेकिंग कहते हैं. इसके अलावा जाली या केज का सहारा ले सकते है. इस प्रक्रिया को केजिंग कहते हैं.
उत्पादन और हार्वेस्टिंग
अगर आप इसकी खेती करते हैं, तो आपको एक एकड़ में ढाई लाख का खर्च आएगा. वहीं, इसकी कीमत 150 से 300 रुपये प्रति किलो तक बनती है. एक एकड़ में 170 से लेकर 260 क्विंटल तक का उत्पादन देते हैं. वहींअच्छी किस्में और बेहतर मैनेजमेंट ज्यादा उत्पादन देता है.
हार्ट और डायबिटीज के लिए बेहतर
काला टमाटर इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करता है. ये दिल और दिमाग को मजबूत करता है. एन्थोसाइनिन और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो हार्ट अटैक के खतरे को कम कर देता है. इसके अलावा ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल करता है. वहीं, यह शुगर लेवल को कंट्रोल करता है, जिससे डायबिटीज को रोकने में मदद करता है.