थाने में जीवित होने का प्रमाण लेने पहुंचे गीता।
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ये आपबीती है मंगलदीन रैकवार और उसकी पत्नी गीता रैकवार की। छतरपुर जिले में खजुराहो के इकलगांव के रहने वाले हैं। गीता को छह माह का गर्भ है। उसे इलाज भी कराना है। गीता को सरकारी रिकॉर्ड में मृत बता दिया है यानी कागजों में वह इस दुनिया में नहीं है।
ऐसे में न उनका इलाज हो पा रहा है, न दवाइयां मिल पा रही हैं और न ही सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। उसने रविवार को बमीठा थाने में भी शिकायत की है। दैनिक भास्कर की टीम खजुराहो से करीब 30 किलोमीटर दूर इकलगांव पहुंची। यहां पीड़ित परिवार और परियोजना अधिकारी से बात की। पढ़िए रिपोर्ट…
मोबाइल पर आधार अपडेटशन में दिखाया गीता को मृत बताया गया है।
‘मौत’ की खबर ने उजाड़ दी खुशियां भास्कर की टीम 35 साल की गीता के घर पहुंची। यहां छोटे से मकान में गीता अपने पति, सास-ससुर और चार देवरों के साथ रहती है। कुछ समय पहले तक घर में किलकारियां गूंजने की तैयारी थी। माली हालत बहुत खराब है।
इसके बावजूद पति मंगलदीन रैकवार दिहाड़ी मजदूरी कर पाई-पाई जोड़ रहे हैं, ताकि आने वाले बच्चे का स्वागत कर सकें। मंगलदीन बताते हैं कि 28 दिसंबर की दोपहर पत्नी गीता को लेकर उज्ज्वला योजना का गैस कनेक्शन लेने पहुंचे थे। ऑपरेटर ने जैसे ही अंगूठा लगवाया, कम्प्यूटर स्क्रीन पर लाल अक्षरों में मैसेज आया- “Aadhaar Suspended: Person is Deceased (मृत)”।

रविवार को गीता और उसकी पत्नी ने थाने में आवेदन दिया है।
बच्चे को कुछ हुआ, तो सिस्टम जिम्मेदार गीता ने सुबकते हुए बताया, मेरे पेट में 6 महीने का बच्चा पल रहा है। आधार बंद होने से न मेरा खाता खुल रहा है, न जांच हो रही है। सरकारी अस्पताल जाते हैं, तो डॉक्टर कहते हैं कि बिना आधार के इलाज नहीं होगा। मेरे बच्चे को इलाज के बिना कुछ हो गया, तो उसका जिम्मेदार यह सिस्टम होगा।
हम रो रहे थे, सचिव हंस रहे थे मामले में सबसे शर्मनाक पहलू ग्राम पंचायत का रवैया है। गीता की सास रामप्यारी रैकवार ने रोते हुए बताया, “जब हम पंचायत सचिव रमेश प्रजापति के पास मदद मांगने गए, तो उन्होंने हमारी बेबसी का मजाक उड़ाया। वे हंसते हुए बोले कि सरकारी रिकॉर्ड गलत नहीं होता।
हम रोने लगे कि हमारी बहू जिंदा है, उसे मरा हुआ मत कहो।” इतना ही नहीं, गांव के कुछ लोग भी अब इस परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। देवर कोमल ने बताया, “राह चलते लोग मजाक उड़ाते हैं कि तुम्हारी बहू तो ‘भूत’ है, वो तो मर चुकी है। हमें घर से निकलने में शर्म आने लगी है।

परेशान दंपती ने थाने पहुंचकर की शिकायत।
गर्भवती को कैसे दिल्ली-भोपाल तक लेकर जाएं मंगलदीन ने बताया कि पिछले एक हफ्ते से जनसेवा केंद्र, ब्लॉक कार्यालय और आधार सेंटर के चक्कर काट रहे हैं। हर जगह से यही जवाब मिलता है कि मामला स्थानीय स्तर का नहीं है। इसे ठीक करवाने के लिए भोपाल या दिल्ली स्तर पर संपर्क करना होगा। अब सवाल है कि दिहाड़ी मजदूर गर्भवती को लेकर बड़े शहरों के चक्कर कैसे काटेगा?
पुलिस और कानून से आखिरी उम्मीद पीड़ित दंपती ने बमीठा थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने मांग की है कि गीता को सरकारी तौर पर ‘पुनर्जीवित’ किया जाए, ताकि उसे मातृत्व लाभ और चिकित्सा मिल सके।

परियोजना अधिकारी बोलीं- जांच करवाती हूं राजनगर परियोजना अधिकारी रजनी शुक्ला ने बताया कि मामले की जांच कराएंगे। पीड़ित महिला को इलाज मिलेगा। आंगनवाड़ी केंद्र से जांच करवा कर उसके जीवित होने का प्रमाणीकरण में बनवा देती हूं। इसके बाद उसके इलाज में दिक्कत नहीं जाएगी। महिला की हर संभव मदद की जाएगी।
अधिकारी से लिखित शिकायत करने की सलाह वकील अरुण उपाध्याय ने बताया कि कागजी गलती के कारण गीता रैकवार को गलत तरीके से मृत घोषित कर दिया गया, जिससे उनका आधार कार्ड सस्पेंड हो गया और उन्हें सरकारी योजनाओं व स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने समाधान के लिए छतरपुर कलेक्ट्रेट में स्थित ई-गवर्नेंस जिला अधिकारी से लिखित शिकायत करने की सलाह दी है, जिसके बाद मामला भोपाल स्थित UIDAI क्षेत्रीय कार्यालय को भेजा जाएगा और आधार फिर से सक्रिय किया जाएगा। यह प्रक्रिया करीब 15 दिन में पूरी हो सकती है, क्योंकि ऐसी बड़ी त्रुटि स्थानीय आधार केंद्रों पर ठीक नहीं होती।