दूषित पानी बना बीमारी की वजह, भागीरथपुरा में डायरिया आउटब्रेक पर काबू, आयुष्मान केंद्र के डॉक्टर बने पहली ढाल

दूषित पानी बना बीमारी की वजह, भागीरथपुरा में डायरिया आउटब्रेक पर काबू, आयुष्मान केंद्र के डॉक्टर बने पहली ढाल


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Bhagirathpura News Update: भागीरथपुरा में पदस्थ डॉक्टर फुजल खान ने बताया कि वह लंबे समय से प्रैक्टिस कर रहे है और उन्होंने कई गांवों में काम किया है लेकिन ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी थी. भागीरथपुरा एक लो-इनकम एरिया है और अधिकतर लोग आयुष्मान केंद्र पर ही आते है. आमतौर पर दिन में 2-4 ही मरीज दस्त या डायरिया की समस्या के साथ आते हैं. लेकिन 27 तारीख के बाद अचानक बड़ी संख्या में मरीज आने लगे.

भागीरथपुरा में दूषित पानी से उत्पन्न संकट अब धीरे-धीरे थमता नजर आ रहा है. अब कुछ ही नए मरीज सामने आ रहे है. हालांकि कुछ लोग अभी भी ICU में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं. प्रशासन ने इसे महामारी घोषित किया था और पूरी व्यवस्था इस पर जुट गई थी. लेकिन सबसे पहले इस समस्या का सामना भागीरथपुरा स्थित आयुष्मान केंद्र के डॉक्टर्स ने किया था. स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि दवाएं भी कम पड़ने लगी थी.

भागीरथपुरा में पदस्थ डॉक्टर फुजल खान ने बताया कि वह लंबे समय से प्रैक्टिस कर रहे है और उन्होंने कई गांवों में काम किया है लेकिन ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी थी. भागीरथपुरा एक लो-इनकम एरिया है और अधिकतर लोग आयुष्मान केंद्र पर ही आते है. आमतौर पर दिन में 2-4 ही मरीज दस्त या डायरिया की समस्या के साथ आते हैं. लेकिन 27 तारीख के बाद अचानक बड़ी संख्या में मरीज आने लगे.

आउटब्रेक के दौरान डॉक्टर्स ने दिन-रात काम किया. सामान्यतः जब इतनी बड़ी संख्या में मरीज आते है तो संभावना होती है कि किसी भंडारे या सामूहिक जगह पर कुछ गलत खाया हो लेकिन ऐसा कुछ भी सामने नहीं आया. मरीजों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि फर्श पर बैठकर भी ड्रिप लगानी पड़ी. हर दूसरा मरीज उल्टी और दस्त की शिकायत के साथ आ रहा था. बच्चों और बुजुर्गों की हालत सबसे ज्यादा खराब थी. जिससे डॉक्टरों की अतिरिक्त टीम बुलाई गई और आशा कार्यकर्ताओं से इलाके का सर्वे शुरू करवा दिया गया.

आयुष्मान केंद्र पर 4-5 डॉक्टर्स की मौजूदगी के बावजूद मरीजों की संख्या कम नहीं हो रही थी. सुबह 9 से रात 8 बजे तक मरीजों का तांता लगा रहा. जिससे मैनेजमेंट भी मुश्किल हो रहा था. जहां आमतौर पर 1 दिन में डायरिया के 5-10 मरीज आते थे. वहीं अब 1 दिन में 250-300 मरीज आ रहे थे. कई मरीजों को दवा देकर ठीक किया गया. लेकिन कुछ को सरकारी हॉस्पिटल में रेफर करना पड़ा. एक ही परिवार के 4-5 सदस्य एक साथ भर्ती होने के मामले भी सामने आए. सबसे मुश्किल उन बच्चों को देखना था जो गंभीर रूप से सुस्त और डिहाइड्रेट हो चुके थे.

आयुष्मान केंद्र की क्षमता सीमित होने के कारण अचानक सैकड़ों मरीजों के आने से जीवन रक्षक दवाइयों और ORS के पैकेट कम पड़ने लगे थे. हालांकि अब स्थिति पूरी तरह से सामान्य हो चुकी है. लोग नगर निगम द्वारा भेजे गए टैंकरों से पानी का उपयोग कर रहे है और नंद की पाइपलाइन को भी तेजी से दुरुस्त किया जा रहा है. आयुष्मान केंद्र पर भी अब उल्टी, दस्त और डायरिया के केवल इक्का-दुक्का केस ही आ रहे है.

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