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Lemon gardening tips: विशेषज्ञों का कहना है कि, एक बार लगाया गया नींबू का बागीचा कई वर्षों तक आमदनी देता है. साथ ही तीन चार साल तक इंटरक्राफ्टिंग में खाली जगह में प्याज, लहसुन, अदरक, हल्दी आदि फसलों का उत्पादन लेकर अतिरिक्त आमदनी भी कमा सकते है.
खरगोन. खेती में बढ़ती लागत और घटती आमदनी से परेशान किसान अब नए विकल्प तलाश रहे हैं. गेहूं, चना, कपास, सोयाबीन और मक्का जैसी पारंपरिक फसलों में मेहनत ज्यादा है, लेकिन मुनाफा सीमित रह गया है. ऐसे में अब कई किसान बागवानी की ओर रुख कर रहे हैं. खासतौर पर नींबू की खेती किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प मानी जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि, एक बार लगाया गया नींबू का बागीचा कई वर्षों तक आमदनी देता है. साथ ही तीन चार साल तक इंटरक्राफ्टिंग में खाली जगह में प्याज, लहसुन, अदरक, हल्दी आदि फसलों का उत्पादन लेकर अतिरिक्त आमदनी भी कमा सकते है.
खरगोन सहित निमाड़ अंचल की जलवायु नींबू की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है. यही वजह है कि बीते कुछ वर्षों में यहां कई किसानों ने पारंपरिक खेती छोड़कर नींबू का बगीचा लगाया और आज वे लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि नींबू की खेती में जोखिम कम है और बाजार भी पूरे साल बना रहता है. शादी-ब्याह, होटल, ढाबे, जूस सेंटर और अचार उद्योग में नींबू की लगातार मांग रहती है.
उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ. एसके त्यागी बताते हैं कि नींबू के पेड़ 10 से 12 साल तक अच्छी तरह फल देते हैं. एक स्वस्थ पेड़ से साल में करीब 200 से 300 नींबू आसानी से मिल जाते हैं. अगर बाजार भाव 2 से 10 रुपए प्रति नग भी रहे, तो एक पेड़ से हजारों रुपए की आमदनी संभव है. यही कारण है कि कम जमीन वाले किसान भी नींबू की खेती से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
बुआई का सही समय ओर किस्में
खेती के लिए साईं शरबती जैसी उन्नत किस्म ज्यादा उपयोगी मानी जाती है. वहीं, नींबू का बागीचा लगाने के लिए फरवरी-मार्च का समय सबसे अच्छा माना जाता है. इस समय मौसम अनुकूल रहता है और पौधे जल्दी जम जाते हैं. पौधे 20 बाय 20 फीट की दूरी पर लगाना उचित रहता हैं, जिससे उन्हें फैलने और फल देने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है. बुआई से पहले खेतों में गड्ढा खोदते समय उसमें सड़ी हुई गोबर खाद और नीम खली मिलाकर भराई करना चाहिए.
किसान रखें इन बातों का ध्यान
विशेषज्ञ कहते है कि, पौधा लगाते समय किसानों को खास सावधानी रखनी चाहिए. पौधे की जड़ टूटनी नहीं चाहिए और पॉलीथिन में जितनी मिट्टी है, उतनी ही जमीन में लगानी चाहिए. पौधा गड्ढे के ठीक बीच में लगाएं और ग्राफ्टिंग वाला हिस्सा जमीन से करीब 6 इंच ऊपर रखें. पौधा लगाने के तुरंत बाद सिंचाई जरूरी है. शुरुआती एक से दो साल तक पौधों की देखरेख पर ध्यान देना होता है, ताकि बागीचा मजबूत बन सके. पानी की बचत के लिए ड्रिप सिंचाई सबसे बेहतर विकल्प है.
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7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें