31 किलो MD ड्रग्स की असली कहानी: इंदौर के कारोबारी ने MSME के नाम पर नर्सरी रजिस्टर्ड करवाई, पर वहां बन रही थी एमडी ड्रग – Ujjain News

31 किलो MD ड्रग्स की असली कहानी:  इंदौर के कारोबारी ने MSME के नाम पर नर्सरी रजिस्टर्ड करवाई, पर वहां बन रही थी एमडी ड्रग – Ujjain News




आगर-मालवा जिले में शनिवार को जिस नर्सरी पर एमडी ड्रग फैक्टरी पकड़ी गई, उसकी जमीन के मालिक इंदौर के बड़े कारोबारी बताए जा रहे हैं। यह नर्सरी ‘तीर्थ उद्यम फॉर्म’ के नाम से संचालित हो रही थी। उद्योग विभाग में इसका लघु एवं सूक्ष्म उद्योग (एमएसएमई) के रूप में रजिस्ट्रेशन 29 जून 2024 को इंदौर में कराया गया था, जबकि प्लांट की रजिस्टर्ड लोकेशन इंदौर के नासिया रोड की दर्शाई गई है। रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों में ईमेल आईडी संदीप पोखरना के नाम पर दर्ज है, जबकि मोबाइल नंबर अभय पोखरना के नाम दर्ज है। इस जमीन से जुड़े अन्य नामों में अनिल पोखरना, अभय पोखरना, संदीप पोखरना और उनके परिजन शामिल हैं। जमीन का एक हिस्सा स्थानीय कालूराम रातड़िया और उनके परिजनों के नाम भी है, जो पहले अन्य मामलों में आरोपी रह चुके हैं। हालांकि, अब तक इस मामले में इनमें से किसी को भी आरोपी नहीं बनाया गया है। भास्कर पड़ताल में सामने आया कि नर्सरी के सामान्य व्यापार के नाम पर बैंक ऑफ इंडिया, परदेशीपुरा (इंदौर) ब्रांच का अकाउंट उपयोग में लिया जा रहा था। अफसरों ने साधी चुप्पी
यह कार्रवाई सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (CBN) ने की है। कार्रवाई के बाद से संबंधित अफसरों ने चुप्पी साध रखी है। सीबीएन नीमच–जावरा प्रकोष्ठ के अधीक्षक वीएस कुमार, जो कार्रवाई के दौरान टीम के साथ मौजूद थे, का कहना है कि यह उनके क्षेत्र का मामला नहीं है। वहीं सीबीएन उज्जैन प्रकोष्ठ के अधीक्षक मुकेश खत्री ने आधिकारिक बयान देने से इनकार कर दिया। इधर, जमीन मालिक अभय कुमार पोखरना फोन और संदेशों का जवाब नहीं दे रहे हैं, जबकि जमीन मालिक कालूराम रातड़िया का मोबाइल बंद है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब टीम नर्सरी पर कार्रवाई के लिए पहुंची, तब स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई, जबकि इलाका दूरस्थ और सुनसान होने के कारण हमले का खतरा बना हुआ था। इस बीच आगर-मालवा के एसपी विनोदकुमार सिंह ने भी कार्रवाई की पूर्व विधिवत सूचना मिलने से इनकार किया है। यह नर्सरी आगर–झालावाड़ रोड पर सुसनेर के पास, मुख्य सड़क से करीब 2 किलोमीटर अंदर सुनसान इलाके में स्थित है। यहां लगातार वाहनों की आवाजाही होती रहती थी, इसलिए स्थानीय लोगों को किसी तरह का शक नहीं हुआ। 15 महीनों में 7 ड्रग फैक्ट्रियों से 1982 करोड़ रुपए की ड्रग्स जब्त भोपाल में पकड़ी गई एमडी ड्रग फैक्टरी से भी जुड़ रहे आगर-मालवा के तार… MSME पोर्टल पर यह इकाई किस काम के लिए रजिस्टर्ड थी?
MSME पोर्टल पर यह इकाई फूल और पौधों के थोक व्यापार के रूप में रजिस्टर्ड थी। इसमें NIC कोड-46 (थोक व्यापार), NIC-4620 (कृषि कच्चा माल व जीवित पशु) और NIC-46205 (फूल व पौधों का थोक व्यापार) दर्ज थे। जमीन मालिक का पिछला कारोबारी बैकग्राउंड क्या रहा है?
जमीन मालिक कालूराम रातड़िया का पहले खनन कारोबार से जुड़ाव रहा है। नर्सरी आगर-मालवा में सुसनेर के पास है। 3 एकड़ में फैक्टरी : सुरक्षा के लिए तारों में करंट रजिस्ट्रेशन में चूक या ढील, जांच जरूरी… इस मामले में उद्योग विभाग व एमएसएमई की जांच प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। नर्सरी का रजिस्ट्रेशन इंदौर का है, जबकि संचालन आगर-मालवा में मिला। उद्यम रजिस्ट्रेशन फॉर्म में लोकेशन का मैप देना अनिवार्य होता है। एमएसएमई और जिला उद्योग केंद्र के अफसर इसे सेल्फ डिक्लेरेशन की प्रक्रिया बता रहे हैं। ऐसे में गलत जानकारी दिए जाने पर विभागीय जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एमएसएमई के असिस्टेंट डायरेक्टर नीलेश त्रिवेदी के मुताबिक, पैन, पता और अन्य विवरण आवेदक स्वयं देता है और गलत जानकारी या आपराधिक गतिविधि सामने आने पर ब्लैकलिस्टिंग व कार्रवाई का प्रावधान है।



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