जडेरुआ खुर्द (ग्वालियर-भिंड रोड) स्थित 14 बीघा जमीन का केस मप्र शासन बिना गुण दोष पर बहस हुए ही हार गया। शासन ने कई वर्ष पहले करोड़ों रुपए की ये जमीन पुलिस विभाग को दे दी थी। लेकिन ट्रायल कोर्ट में जमीन के मालिकाना हक का केस हार गई। बाद में इस जमीन को लेकर 2007 में शासन ने हाई कोर्ट में रामसेवक के खिलाफ याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान जब 2008 में उनकी मृत्यु हो गई लेकिन इसके बावजूद उनके वारिसों को केस में पक्षकार नहीं बनाया गया। इसी के चलते हाई कोर्ट ने जनवरी 2025 में शासन की याचिका खारिज कर दी। याचिका को फिर से सुनवाई पर लेने एक याचिका दायर की गई। उसे पेश करने में भी 222 दिन की देरी हुई। देरी को माफ करने शासन की ओर से आवेदन दिया गया। हाई कोर्ट ने शासन से जब पूछा कि देरी के लिए कौन पुलिस अधिकारी जिम्मेदार है और उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? मंगलवार 14 जनवरी को कोर्ट में डीजीपी का आदेश (12 जनवरी) पेश किया गया। इसमें तत्कालीन सीएसपी राजीव जंगले को परिनिंदा की सजा दी गई। कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने कहा- विभाग अपने तरीकों को सुधारने के लिए तैयार नहीं है। इन तारीखों से समझें मामला
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