त्रेता और द्वापर युग की साक्षी बुंदेलखंड की धरती, महाभारत कालीन विराट नगर एरण की ऐतिहासिक गाथा

त्रेता और द्वापर युग की साक्षी बुंदेलखंड की धरती, महाभारत कालीन विराट नगर एरण की ऐतिहासिक गाथा


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Sagar News: महाभारत काल में द्रौपदी सहित पांडवों ने 12 साल के वनवास और 1 साल के अज्ञातवास का सामना किया था. इस दौरान वे विराट नगर में विभिन्न रूपों में रहे और राजा विराट की सेवा की. राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर मोहनलाल चढ़ार बताते है कि ऐहोल अभिलेख में लगभग 634 ईस्वी में महाभारत युद्ध की तिथि 3100 ईसा पूर्व मानी जाती है.

त्रेता युग और द्वापर युग का बुंदेलखंड से गहरा संबंध रहा है. भगवान राम ने वनवास के दौरान इस पावन धरती को पार किया था और महाभारत काल में पांडवों ने अपना अज्ञातवास इसी क्षेत्र में बिताया था. महाभारत कालीन विराट नगर को आज के एरण के नाम से जाना जाता है. इतिहासकारों के अनुसार सागर जिले का अधिकांश हिस्सा चेदी जनपद में आता है. लेकिन खुरई से बीना तक पहुंचते ही विराट नगर की सीमा शुरू होती है जो एरण का प्रवेश द्वार था.

महाभारत काल में द्रौपदी सहित पांडवों ने 12 साल के वनवास और 1 साल के अज्ञातवास का सामना किया था. इस दौरान वे विराट नगर में विभिन्न रूपों में रहे और राजा विराट की सेवा की. राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर मोहनलाल चढ़ार बताते है कि ऐहोल अभिलेख में लगभग 634 ईस्वी में महाभारत युद्ध की तिथि 3100 ईसा पूर्व मानी जाती है. यह क्षेत्र ताम्र पाषाण कालीन संस्कृति के समकालीन माना जाता है और सागर जिले के एरण में लगभग 4500 साल पुरानी संस्कृति मिलती है.

एरण में किए गए अनुसंधानों में पाया गया है कि यह महाभारत कालीन विराट नगर और विराट नरेश की राजधानी थी. अज्ञातवास के दौरान पांडव यहां रुके थे और स्थानीय लोककथाओं के अनुसार एरण और इसके सीमावर्ती गांवों के नाम महाभारत की घटनाओं से जुड़े हुए है.

एरण में की गई खुदाई से हड़प्पा सभ्यता की समकालीन ताम्र पाषाण कालीन संस्कृति के अवशेष मिले है. यहां से तीसरी सदी ईसा पूर्व का भारत का प्रथम अभिलिखित सिक्का मिला है. जिसमें राजा धर्मपाल का उल्लेख है. एरण में 48 फीट ऊंचा गरुड़ स्तंभ और विशाल विष्णु प्रतिमा है. जो गुप्त काल की है. समुद्रगुप्त के अभिलेख भी यहां से मिले है जो कोलकाता संग्रहालय में सुरक्षित है. इन सभी कारणों से एरण ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है.

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महाभारत कालीन विराट नगर एरण की ऐतिहासिक गाथा, पांडवों से भी रहा है खास नाता



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