55 साल का रिश्ता और दिव्यांग पत्नी, पेड़ के नीचे गुजरती अनंतराम की जिंदगी; गरीबी और बेबसी के बीच भी अटूट है प्यार

55 साल का रिश्ता और दिव्यांग पत्नी, पेड़ के नीचे गुजरती अनंतराम की जिंदगी; गरीबी और बेबसी के बीच भी अटूट है प्यार


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Emotional love story: करीब 55 साल पहले अनंतराम चौधरी और राजवंता की शादी हुई थी और तब से वे साथ ही रहे है. उनके दो बेटे है. लेकिन शराब की लत ने उन्हें घर से दूर कर दिया है. अनंतराम बताते है कि पांच साल पहले उनकी पत्नी को लकवा मार गया और उनकी जिंदगी बदल गई. तब से राजवंता दिन भर व्हीलचेयर पर ही है और उन्हें तीन तरह की बीमारियां भी है. वह कुछ नहीं कर सकती है. इसलिए उनके पति ही उनकी देखभाल करते है.

जय स्तंभ चौक के पास व्यस्त चौराहे पर अनंतराम चौधरी एक पेड़ के नीचे अपनी छोटी सी दुकान में चप्पल-जूते सीने का काम करते है. उनके पास संपत्ति के नाम पर एक ठेला, संदूक, कुछ औजार और पॉलिश की चंद डिब्बियां है. लेकिन उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी उनकी दिव्यांग पत्नी है, जो पिछले पांच साल से व्हीलचेयर पर है. शादी को 55 साल बीत चुके है. लेकिन उनका प्यार आज भी उतना ही है. उनके दो बेटे है. लेकिन शराब की लत ने उन्हें परिवार से दूर कर दिया है. उनकी पत्नियां भी बच्चों को लेकर मायके चली गई है. लेकिन उनकी नातिन अपने दादा से प्यार करती है और उन्हीं के साथ रहती है.

करीब 55 साल पहले अनंतराम चौधरी और राजवंता की शादी हुई थी और तब से वे साथ ही रहे है. उनके दो बेटे है. लेकिन शराब की लत ने उन्हें घर से दूर कर दिया है. अनंतराम बताते है कि पांच साल पहले उनकी पत्नी को लकवा मार गया और उनकी जिंदगी बदल गई. तब से राजवंता दिन भर व्हीलचेयर पर ही है और उन्हें तीन तरह की बीमारियां भी है. वह कुछ नहीं कर सकती है. इसलिए उनके पति ही उनकी देखभाल करते है.

उनके पास रहने के लिए एक जर्जर स्कूल का हिस्सा है. जहां अनंतराम, राजवंता और उनकी नातिन रहते है. सुबह उठते ही अनंतराम घर का सारा काम करते है. जैसे झाड़ू लगाना, खाना बनाना और फिर अपनी पत्नी को नहलाना. इसके बाद वह उनके बाल संवारते और खाना खिलाते है. फिर व्हीलचेयर पर उन्हें बिठाकर दुकान तक लाते है.

दिन भर अनंतराम फटे-पुराने जूते चप्पल सीते है और अपनी पत्नी का ख्याल भी रखते है. शाम होते ही वह फिर से अपनी पत्नी को व्हीलचेयर पर घर ले जाते है और घर के कामों में जुट जाते है. जैसे बर्तन साफ करना और खाना बनाना. फिर पूरा परिवार साथ खाना खाता है और कल की चिंता करते हुए सो जाता है.

पहले अनंतराम और उनकी पत्नी दुकान के पीछे एक छोटी सी झोपड़ी में रहते थे. लेकिन एक मैडम ने ठंड को देखते हुए उन्हें एक जर्जर स्कूल के बरामदे में रहने के लिए कहा. अब वे वहीं रहते हैं. अनंतराम ने प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन किया. लेकिन नगर पालिका कहती है कि पहले जमीन बताओ तब जाकर आवास योजना का लाभ मिलेगा. ऐसे में अनंतराम के पास रुपया पैसा या जमीन नहीं है, इसलिए वे इधर-उधर रहकर जीवन यापन करते है.

अनंतराम और उनकी पत्नी को शासन से वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत महज 600 रुपए मिलते है. वहीं, अनंतराम फटे-पुराने जूते सीकर चंद रुपए कमा लेते है. जिससे परिवार का पालन पोषण होता है. अनंतराम के भरोसे ही पूरे परिवार का पालन पोषण होता है. राजवंता सोचकर सिहर उठती हैं कि अगर उनके पति को कुछ हो गया तो क्या होगा.

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एक ठेला, एक व्हीलचेयर और 55 साल का प्रेम, अनंतराम की दर्दभरी कहानी



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