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Khandwa News: खंडवा जिले के ग्रामीण इलाकों में बच्चों के दांतों का पीला पड़ना अब आम बात हो गई है. डॉक्टरों के अनुसार यह डेंटल फ्लोरोसिस का शुरुआती लक्षण है. अगर लंबे समय तक फ्लोराइड युक्त पानी का सेवन किया जाए तो यह बीमारी आगे चलकर स्केलेटल फ्लोरोसिस का रूप ले लेती है. इसमें हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर और खोखली होने लगती है. जोड़ों में दर्द रहता है और चलने-फिरने में दिक्कत होने लगती है.
पानी इंसान की सबसे बुनियादी जरूरतों में से एक है. इसके बिना न इंसान जीवित रह सकता है न जानवर और न ही पेड़-पौधे. लेकिन बीते कुछ सालों में यही पीने का पानी धीरे-धीरे जहर बनता जा रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह है पानी में बढ़ती फ्लोराइड की मात्रा जो चुपचाप शरीर को खोखला कर रही है. मध्य प्रदेश के खंडवा जिले का किलोद क्षेत्र इस गंभीर समस्या से बुरी तरह जूझ रहा है. इसके अलावा गड़बड़ी रैयत, गड़बड़ी माल, पाटाखाली, जूनापानी, बिल्लौद, मालूद, बलियापुरा, झागरिया, हरिपुरा, लखेरामाल और धनवानी जैसे कई गांवों में फ्लोराइड युक्त पानी लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन चुका है. हैरानी की बात यह है कि इन इलाकों में लोग पिछले कई दशकों से इसी दूषित पानी का उपयोग कर रहे हैं.
खंडवा जिले के ग्रामीण इलाकों में बच्चों के दांतों का पीला पड़ना अब आम बात हो गई है. डॉक्टरों के अनुसार यह डेंटल फ्लोरोसिस का शुरुआती लक्षण है. अगर लंबे समय तक फ्लोराइड युक्त पानी का सेवन किया जाए तो यह बीमारी आगे चलकर स्केलेटल फ्लोरोसिस का रूप ले लेती है. इसमें हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर और खोखली होने लगती है. जोड़ों में दर्द रहता है और चलने-फिरने में दिक्कत होने लगती है.
एक्सपर्ट डॉक्टर क्या कहते
Local 18 से बातचीत डॉ. अनिल पटेल बताते है कि फ्लोराइड शरीर में धीरे-धीरे जमा होता है और इसका असर कई सालों बाद सामने आता है. सबसे ज्यादा खतरे में बच्चे, गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग रहते है. अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो यह समस्या जीवनभर का दर्द बन सकती है.
फ्लोराइड से बचाव के उपाय
डॉक्टर अनिल पटेल के अनुसार पीने से पहले पानी को आरओ या फ्लोराइड फिल्टर से जरूर शुद्ध करें. जहां सरकारी डिफ्लोराइडेशन प्लांट लगे है. उनका उपयोग करें बच्चों को फ्लोराइड युक्त पानी से दूर रखें. खाने में कैल्शियम, आयरन और विटामिन-C युक्त आहार शामिल करें. दांत पीले पड़ना, जोड़ों में दर्द या चलने में परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं.
जागरूकता ही है सबसे बड़ा समाधान
डॉक्टरों का कहना है कि जब तक लोग खुद जागरूक नहीं होंगे, तब तक इस गंभीर समस्या से निजात पाना मुश्किल है. साफ और सुरक्षित पानी कोई सुविधा नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन की पहली शर्त है. समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो आने वाली पीढ़ियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.