संत कर रहे नर्मदा की अधोमुखी परिक्रमा: मानव कल्याण के लिए गुरु आज्ञा पर परिक्रमा; दर्शन को उमड़ रहे श्रद्धालु – Dindori News

संत कर रहे नर्मदा की अधोमुखी परिक्रमा:  मानव कल्याण के लिए गुरु आज्ञा पर परिक्रमा; दर्शन को उमड़ रहे श्रद्धालु – Dindori News




डिंडौरी में एक संत शरीर पर भभूत और लंगोट धारण कर नर्मदा की अधोमुखी परिक्रमा कर रहे हैं। वे केवल एक गिलास दूध और एक रोटी दाल का सेवन करते हैं। इस कठिन तपस्या को वे मानव कल्याण के लिए कर रहे हैं और उनके दर्शन के लिए ग्रामीण उत्सुकता से प्रतीक्षा करते हैं। 24 वर्षीय संत धरम पुरी महाराज डिंडौरी जिले के बजाग विकासखंड के ग्राम रतना के निवासी हैं। उनका गांव नर्मदा नदी के किनारे बसा है, जहां उनका आश्रम भी है। उन्होंने बताया कि बचपन से ही वे नर्मदा के सान्निध्य में रहे। 12 वर्ष की आयु में उन्होंने पहली नर्मदा परिक्रमा की और उसके बाद तीन बार पैदल परिक्रमा पूरी की। संत धरम पुरी ने अपनी शिक्षा आश्रम में गुरु शंकरपुरी महाराज और अन्य संतों से प्राप्त की। उन्होंने बताया कि एक दिन उनके गुरु ने उन्हें अधोमुखी परिक्रमा करने का आदेश दिया। इस आदेश का पालन करते हुए, उन्होंने विजयदशमी के दिन अमरकंटक स्थित मां नर्मदा के उद्गम स्थल माई की बगिया से अपनी यह अनोखी परिक्रमा शुरू की। तड़के प्रतिदिन तीन बजे उठ जाते है परिक्रमा के दौरान संत की दिनचर्या अत्यंत कठोर है। वे प्रतिदिन रात तीन बजे उठ जाते हैं। नित्यकर्म के बाद वे भगवान के लिए प्रसाद तैयार करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। सुबह से ही उनके दर्शन के लिए आने वाले ग्रामीणों को भी वे समय देते हैं, जिसके बाद उनकी परिक्रमा शुरू होती है। संत ने बताया कि उन्हें मां नर्मदा का आशीर्वाद प्राप्त है, जिसके कारण उनके हाथों में न छाले पड़ते हैं और न ही शरीर में कोई दर्द होता है। ठंड के मौसम में वे सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक परिक्रमा करते हैं, जिसमें वे लगभग दो किलोमीटर की दूरी तय कर पाते हैं। उनके साथी जहां टेंट लगाते हैं, वहीं वे विश्राम करते हैं। इस परिक्रमा में संत धरम पुरी के साथ चार सहयोगी भी चलते हैं। इनमें सुमन गिरी, हनुमान गिरी, तपस्या पुरी और प्रदीप पुरी शामिल हैं, जो उनकी यात्रा में सहायता करते हैं।



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