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Jabalpur में सत्यजीत पटेल द्वारा बनाई गई तंजौर पेंटिंग सोने की रैपिंग और अर्ध कीमती पत्थरों से सजती है, जिसकी कीमत 10 से 15 हजार तक होती है और इसे बनाने में 10 से 15 दिन लगते हैं.
Jabalpur News: पेंटिंग तो आपने देखी ही होगी, लेकिन एक ऐसी पेंटिंग जो सोने से तैयार की जाती है, शायद ही देखी हो. इसकी कीमत जानकर आपके होश उड़ जाएंगे. हालांकि, यह पेंटिंग काफी महंगी जरूर है, लेकिन बनने के बाद लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है. इसे बनाने में कम से कम 10 से 15 दिन का समय लगता है.
दरअसल, सोने से तैयार की गई इस पेंटिंग को तंजौर पेंटिंग कहा जाता है, जो दक्षिण भारत की एक शास्त्रीय कला की शैली है. इसकी शुरुआत 16वीं सदी के अंत में तमिलनाडु से हुई थी. इस कला की पहचान चमकीले रंग सुनहरी वर्क, अर्ध कीमती पत्थर और उभरी हुई 3D बनावट से होती है. इसमें परंपरागत रूप से देवी देवताओं और उनकी लीलाओं से जुड़े दृश्य को बनाया जाता है.
चौक मिट्टी और फेविकोल मिलाकर तैयार होता हैं पेस्ट
कलाकार सत्यजीत पटेल ने बताया पेंटिंग तैयार करने के लिए सबसे पहले चौक और मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है, जहां चौक मिट्टी और फेविकोल को मिलाकर पेस्ट तैयार किया जाता है. साथ ही कलर का प्रयोग कर पेटिंग तैयार होती है. इसके अलावा सोने की पतली रैपिंग का भी पेंटिंग में इस्तेमाल किया जाता है, जिसे चिपकाने का काम किया जाता है. अमूमन यह गोल्ड की रैपिंग आभूषण जैसे कंगन, चूड़ियां, करधन या फिर हार बनाने में किया जाता है.
आभूषण के लिए की जाती है गोल्ड रैपिंग
उन्होंने बताया इस तरीके से पेंटिंग को बनाने में 5 से 6 हजार का मटेरियल इस्तेमाल होता है. जिसमें कलर से लेकर गोल्ड रैपिंग शामिल होती है. वहीं पेंटिंग तैयार होने के बाद यही पेंटिंग 10 लेकर 15 हजार तक मार्केट में बेची जाती है. हालांकि, पेटिंग के दाम आकार पर निर्भर करते है. उन्होंने बताया पेंटिंग को बनाने में 10 से 15 दिन का समय लगता है. पेंटिंग बनने के बाद काफी आकर्षक दिखाई देती है.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें