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Agriculture Tips: सीधी में किसान फसलों को आवारा पशुओं से बचाने के लिए देसी जुगाड़ अपनाने लगे हैं. घर में पड़ी पुरानी साड़ियों से बनाई गई बाड़ न केवल फसल की सुरक्षा करती है, बल्कि सस्ती और पर्यावरण के अनुकूल भी है. जानें इसके फायदे…
Agri Tips: सीधी जिले के किसान आवारा पशुओं से खासा परेशान हैं. फसल बुवाई के बाद जंगली सूअर, नीलगाय और अन्य आवारा पशु खेतों में घुसकर महीनों की मेहनत पर पानी फेर देते हैं. खासतौर पर जंगल से सटे इलाकों में यह समस्या और भी विकराल रूप ले चुकी है. किसानों द्वारा कई उपाय किए जाने के बावजूद अब तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है.
रामपुर नैकिन क्षेत्र में किसानों ने जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए एक अनोखा और देसी उपाय अपनाया है. यहां खेतों की मेड़ों पर बांस गाड़कर पुरानी और रंगीन साड़ियों को बांधा गया है. दूर से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है मानो खेतों ने साड़ियां पहन रखी हों. इस दृश्य को देखकर बाहर से आने वाले लोग भी हैरान रह जाते हैं. कुछ स्थानों पर किसानों ने साड़ियों के साथ-साथ फेंसिंग भी कराई है, ताकि फसल और अधिक सुरक्षित हो सके.
इन दिनों खेतों में रबी की फसलें लहलहा रही हैं, लेकिन जंगली जानवर रात के समय झुंड में खेतों में घुसकर भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं. वे न केवल फसलों को चर जाते हैं, बल्कि खेतों में दौड़-भाग कर फसल को रौंद भी देते हैं. इस कारण कई किसानों को रात भर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है.
हिट हो गया ये तरीका
जंगली जानवरों से बचाव के लिए किसान अलग-अलग प्रयोग कर रहे हैं. कुछ किसान रात के समय पटाखे फोड़ते हैं, जिससे तेज आवाज सुनकर जानवर भाग जाते हैं, लेकिन कुछ देर बाद फिर लौट आते हैं. वहीं, साड़ियों का उपाय अपेक्षाकृत ज्यादा कारगर साबित हो रहा है. किसानों का कहना है कि साड़ियों की वजह से जानवरों को खेत के अंदर की फसल दिखाई नहीं देती और उन्हें ऐसा लगता है कि खेत में कोई व्यक्ति मौजूद है, इसलिए वे भीतर प्रवेश नहीं करते.
कीटों से भी रक्षा
किसान सलाहकार कृष्णकांत तिवारी ने लोकल 18 को बताया कि मेड़ों पर साड़ियां बांधने से जंगली जानवर खेतों से दूरी बनाए रखते हैं. रंगीन साड़ियों के कारण जानवरों को मनुष्य की मौजूदगी का आभास होता है और वे खेत में जाने से बचते हैं. साथ ही साड़ियों से कीटों का प्रकोप भी कम होता है, क्योंकि हवा के साथ आने वाले कीट कपड़े से टकराकर फसल तक नहीं पहुंच पाते. इस देसी जुगाड़ से किसान कम खर्च में फसलों की रक्षा कर पा रहे हैं.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें