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Ujjain News: महाकाल की नगरी उज्जैन में कई ऐसे ऐतिहासिक स्थल हैं, जिनको देखने लोग दूर-दूर से आते हैं. यहां मंदिर के साथ, कई और फेमस जगह भी हैं. यहां एक ही तरह से 52 कुंड बनाए गए हैं. इस वजह से पैलेस को उज्जैन ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण जगह में से एक माना जाता है.
धार्मिक नगरी उज्जैन विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल के नाम से जानी जाती है. यहा राजा के रूप मे स्वयंम महाकाल पूजे जाते हैं. यह अवंतिका नगरी में कई ऐसे पर्यटक स्थल हैं. जो लोगों को यहां खींच कर ले आते हैं. अगर आप भी यह अवंतिका नगरी में छुट्टियां बिताने आने वाले हैं. तो यहा महाकाल के आलवा इन जगहों पर न जाना भूले.

धार्मिक नगरी उज्जैन में सबसे बड़ा और आकर्षण का केंद्र इन दिनों महाकाल लोक बना हुआ है. उज्जैन में 11 अक्टूबर 2022 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भव्य महाकाल कॉरिडोर का लोकार्पण करने पहुंचे थे. उसके बाद से महाकाल की नगरी में रोजाना पर्यटकों की संख्या बढ़ती ही नजर आ रही है.

महाकाल लोक के उद्घाटन और महाकाल मंदिर के महत्व के चलते उज्जैन सबसे बड़ा धार्मिक केंद्र बनकर उभरा हुआ नजर आ रहा है. श्रद्धालुओं की संख्या में जबरदस्त उछाल देखने को लगातार यहां मिल रहा है, जिससे स्थानीय व्यापार और होटल उद्योग को भी फायदा हुआ. अगर 6 महीने पहले की आंकड़े की बात करें तो उज्जैन में 7.32 करोड़ आए हैं. महाकाल के दर्शन करने के अलावा पर्यटकों ने महाकाल लोक भी खूब लुभा रहा है.
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महाकाल की नगरी मे मोक्ष दायनी मां शिप्रा का वास है. यह अवंतिका नगरी में जो भी पर्यटक आता है. वह रामघाट का सुन्दर नज़ारा नहीं देखना भूलता हर 12 वर्ष में यहां सिंहस्थ (कुंभ) मेले का आयोजन भी होता है. जिसमें करोड़ों लोग आस्था की डुबकी लगाने उज्जैन पहुंचते हैं.

उज्जैन की जीवाजी वेधशाला (Jantar Mantar) का निर्माण जयपुर के महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय (Sawai Jai Singh II) ने 1725 ईस्वी के आस-पास करवाया था, जिसे स्थानीय रूप से ‘जंतर मंतर’ भी कहते हैं, और यह भारत की पांच वेधशालाओं में से एक है, जिसका मुख्य उद्देश्य खगोलीय गणनाओं को सटीक बनाना था, यहां आज भी पर्यटक खगोलीय घटना इस वैधशाला मे रखे यन्त्र के माध्यम से देखने आते हैं.

महाकाल की नगरी में महाकाल के प्रसाद के रूप में एक भोजनशाला का निर्माण महाकालेश्वर मंदिर समिति की ओर से किया गया है. यह देश की सबसे बड़ी भोजशाला में शामिल है. भोजशाला में सुबह और शाम को 50000 श्रद्धालु भोजन कर सकते हैं. जो भी पर्यटक उज्जैन आता है. वह यहां बैठकर स्वादिष्ट भोजन का लुफ्त उठाना नहीं भूलता.

शिव की नगरी उज्जैन में नगर के कोतवाल स्वयंम कालभैरव भी विराजमान है. जो पूरे नगर की रक्षा करते हैं. इतना ही नहीं यह प्रतीमा बेहद चमत्कारी है. जो मंदिरा पान करती है. यह चमत्कार देखने लोग दूर-दूर से आते हैं.

कालियादेह महल मध्य प्रदेश के उज्जैन में शिप्रा के तट पर स्थित एक महल है. यह उज्जैन के सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थलों में से एक माना जाता है. एक समय क्षिप्रा नदी के तट पर सूर्य कुंड और ब्रह्म कुंड नामक दो तालाबों वाला यह स्थान सूर्य के सुंदर मंदिर के रूप में दर्ज है. कालियादेह महल में पुराण प्रसिद्ध सूर्य मंदिर भी है. इस महल का निर्माण 1458 ई में महमूद खिलजी के शासन काल में हुआ था. जिसको आज भी पर्यटक आज भी देखने आते हैं.