भोपाल. आदिवासी समाज और हिंदू पहचान को लेकर दिए गए कांग्रेस नेता फूल सिंह बरैया के बयान ने सियासी हलकों में नया विवाद खड़ा कर दिया है. इस बयान पर भाजपा प्रवक्ता शहज़ाद पूनेवाला ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है. शहज़ाद पूनेवाला ने कहा कि हिंदू आस्था पर चोट करना अब कांग्रेस पार्टी का SOP बन चुका है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस जानबूझकर हिंदू समाज को बांटने की राजनीति कर रही है ताकि उसे वोट बैंक का फायदा मिल सके. भाजपा प्रवक्ता के मुताबिक, कभी जाति के नाम पर, कभी भाषा के आधार पर और अब आदिवासियों को हिंदू न मानने जैसे बयान देकर कांग्रेस समाज में विभाजन पैदा करने का प्रयास कर रही है.
शहज़ाद पूनेवाला ने कहा कि फूल सिंह बरैया का बयान केवल एक व्यक्ति की राय नहीं, बल्कि कांग्रेस की सोच को दर्शाता है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस एक तरफ मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट करने की बात करती है, लेकिन हिंदू समाज को लगातार अलग-अलग हिस्सों में बांटने का काम कर रही है. पूनेवाला ने कहा कि हिंदू आस्था का अपमान कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कांग्रेस की पहचान बन चुकी है. इस पूरे विवाद ने आदिवासी पहचान, धर्म और राजनीति के मुद्दे को फिर से केंद्र में ला दिया है और इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है.
फूल सिंह बरैया के बयान से शुरू हुआ विवाद
कांग्रेस नेता फूल सिंह बरैया ने हाल ही में एक सार्वजनिक बयान में कहा था कि आदिवासी हिंदू नहीं होते. उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई आदिवासी हिंदू बन गया तो समझिए वह जिंदा मर जाएगा. इस बयान को लेकर भाजपा और कई सामाजिक संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है. बरैया ने यह भी दावा किया कि आरएसएस आदिवासी इलाकों में हनुमान की मूर्तियां बांट रहा है और आदिवासियों को हिंदू बनाने की कोशिश कर रहा है.
शहज़ाद पूनेवाला का सीधा आरोप
भाजपा प्रवक्ता शहज़ाद पूनेवाला ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस अब खुलकर हिंदू आस्था के खिलाफ बयान दिलवा रही है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की रणनीति साफ है, हिंदू समाज को कैसे बांटा जाए, इसी पर राजनीति की जा रही है. कभी जाति के आधार पर, कभी आदिवासी और गैर-आदिवासी के नाम पर और अब धार्मिक पहचान को लेकर बयान दिए जा रहे हैं.
‘बांटो और राज करो’ की राजनीति का आरोप
शहज़ाद पूनेवाला ने कांग्रेस पर ब्रिटिश काल की बांटो और राज करो की नीति को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक तरफ मुस्लिम समाज को एक वोट बैंक के रूप में देखने की बात करती है, लेकिन पसमांदा और अशराफ जैसे मुद्दों पर चुप रहती है. वहीं, हिंदू समाज को बार-बार विभाजित करने का प्रयास किया जाता है.
भाजपा के प्रमुख आरोप
सरना धर्म का जिक्र
फूल सिंह बरैया ने अपने बयान में झारखंड में लाए गए सरना धर्म कोड विधेयक का भी उल्लेख किया था. उन्होंने कहा था कि आदिवासियों का अलग धर्म है और सरना को ही आदिवासी धर्म के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए. इस पर भाजपा का कहना है कि आदिवासी समाज की आस्था को राजनीति से जोड़कर भ्रम फैलाया जा रहा है.
राजनीतिक प्रतिक्रिया और बढ़ता टकराव
इस बयानबाजी के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आदिवासी समाज की पहचान को लेकर सियासी टकराव और तेज हो गया है. भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस आदिवासियों को हिंदू समाज से अलग दिखाकर उन्हें राजनीतिक मोहरा बनाना चाहती है. वहीं, कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर अलग-अलग तर्क सामने आ रहे हैं.