रोज 12-15 सौ, साल का 5-6 लाख, बचपन के शौक पर 25 साल से रुपये लुटा रहे सागर के ये व्यवसायी, कहानी चौंका देगी!

रोज 12-15 सौ, साल का 5-6 लाख, बचपन के शौक पर 25 साल से रुपये लुटा रहे सागर के ये व्यवसायी, कहानी चौंका देगी!


Sagar News: सागर के एक व्यापारी 55 साल में बचपन वाला काम कर रहे हैं. वह बच्चों के साथ रोज क्रिकेट खेलते हैं. यही नहीं, इसके लिए वह रोज 12-15 सौ रुपए भी खर्च करते हैं. यह सिलसिला 25 साल से चला आ रहा है. सीमेंट व्यापारी सुभाष जैन के मुताबिक जब उनकी पढ़ने-खेलने की उम्र थी, उस समय पिता का निधन होने की वजह से दुकान और परिवार की जिम्मेदारी आ गई थी. आर्थिक परेशानियों की वजह से वह खेल नहीं पाए. इसलिए 30 साल तक मेहनत से पैसा कमाने के बाद अब अपने बचपन वाले शौक पूरे कर रहे हैं.

महीने में 40-50 हजार और सालाना करीब 5 लाख रुपये तक बच्चों में बांटते हैं. ये उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है. भाग्योदय के पास विद्यासागर कॉलोनी के रहने वाले सुभाष जैन बताते हैं कि 10 साल की उम्र में उनके पिता का स्वर्गवास हो गया था. उन पर ही घर की जिम्मेदारियां आ गई थीं. वह दुकान चलाने लगे थे. 30 साल तक यह सिलसिला चलता रहा. वह कभी खेल नहीं पाए. अब 20-25 साल से प्रतिदिन क्रिकेट खेलते हैं. जो 25 साल से कम वाले युवाओं को भी क्रिकेट खिलाते हैं. बच्चों को खेल के लिए प्रोत्साहित भी करते हैं.

बॉलिंग, कैच, फील्डिंग का ये है रेट
आगे बताया, जो बच्चे क्रिकेट खेलने आते हैं, उनको फील्डिंग, स्टंपिंग, बॉलिंग, आउट करने वाले बच्चों को अलग-अलग पैसे देते हैं. यह काम सन 2000 से चल रहा है. 20 साल तक रेलवे स्टेशन के पास ग्राउंड में खेलते थे, लेकिन वहां दिक्कत आ जाने के बाद 2020 से गौर ग्राउंड (कलेक्टर बंगला) में आ गए हैं. कोई भी बच्चा आ जाए, कहीं से भी आ जाए, 25 साल से कम का हो, पान गुटखाना नहीं खाता हो तो उसको साथ में खेलते हैं. एक घंटे फील्डिंग करने के लिए 30 रुपये, एक से ज्यादा कैच लिया तो हर कैच का 5 रुपये, बॉलिंग करने वालों को 50 रुपए, कोई बोल्ड आउट करता है तो 50 उसके जुड़ जाते हैं, स्टंपिंग करने वाले को 40 रुपये देते हैं. इस तरह से रोजाना 1200 से 1500 रुपए क्रिकेट खेलने वाले बच्चों को बांटते हैं.

खुद बैटिंग करते हैं…
सुभाष जैन बताते हैं, बच्चे इन पैसों का अलग-अलग तरह से उपयोग कर लेते हैं. कोई कपड़े खरीद लेता है, कोई स्कूल की फीस भर देता है, कोई किताबें ले लेता है, कोई पैसे इकट्ठा करके यात्रा कर आता है, कोई अपने घर में दे देता है, पैसे बांटने से बच्चों के मन में लालच होता है और वह रोजाना ग्राउंड पर आते हैं. सुभाष इन बच्चों को बैट, बॉल, स्टंप भी देते हैं. सुभाष रोजाना शाम 4 बजे ग्राउंड पहुंच जाते हैं. वह बैटिंग करते हैं. बच्चों से फील्डिंग और बॉलिंग करवाते हैं.

सिर्फ क्रिकेट में नहीं, यहां भी मदद
सुभाष जैन केवल क्रिकेट के मैदान में ही पैसे नहीं देते, बल्कि गरीब और आर्थिक रूप से पिछड़े बच्चों की भी भरपूर मदद करते हैं. कई बच्चों की फीस भरी है, कई युवाओं की सहायता करके रोजगार से जोड़ा है, उनके द्वारा तैयार किए गए बच्चे आर्मी में भी सेलेक्ट हुए हैं. सुभाष ने बताया, जो बच्चा पढ़ना चाहता है, उसको किताबों में या फीस भरने में मदद करते हैं. कोई युवक अपना रोजगार शुरू करना चाहता है तो 20-25 हजार की मदद कर फाइनेंस की व्यवस्था करवा देते हैं, क्योंकि यही उम्र कुछ करने की होती है, उम्र निकल जाती है तो फिर न व्यवसाय होता है, न नौकरी में मन लगता है.



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