भिंड के बरही में विलुप्तप्राय बाटागुर प्रजाति के कछुओं का संरक्षण किया जा रहा है। यहां वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, देहरादून की देखरेख में कछुआ संरक्षण केंद्र संचालित है। केंद्र में वर्तमान में 114 बाटागुर और हाल ही में रेस्क्यू किए गए 7 लेसीमस कछुए रखे गए हैं। इनके लिए तीन बड़े पूल बनाए गए हैं। चंबल अभयारण्य के एसडीओ श्याम सिंह चौहान के अनुसार, अंडों से निकलने के बाद बच्चों को यहां लाकर विशेषज्ञों की निगरानी में पाला जाता है और बाद में नदी में छोड़ा जाता है। केंद्र में बाटागुर की दोनों प्रजातियां-रेड क्राउन रूफ्ड टर्टल और थ्री-स्ट्राइप्ड रूफ्ड टर्टल मौजूद हैं। ठंड से बचाने के लिए पूल ढंके रहते हैं और तय तापमान बनाए रखा जाता है। क्यों खास है यह संरक्षण
बाटागुर कछुआ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में शामिल है। इसे बाघ और घड़ियाल जैसी सर्वोच्च कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। शिकार, पकड़ या व्यापार पर कड़ी सजा का प्रावधान है। 2023 में लाए गए कछुओं में से 25 को सोन घड़ियाल सेंचुरी, सीधी भेजा जा चुका है, शेष को चंबल में छोड़ने की तैयारी है।
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