इंदौर में दूषित पानी से 24 लोगों की मौत के बाद उज्जैन प्रशासन पूरी तरह सतर्क मोड में नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर सोमवार को उज्जैन शहर में एक साथ 9 स्थानों पर जन जल सुनवाई आयोजित की गई। इसी क्रम में इंद्रानगर क्षेत्र में आयोजित जल सुनवाई में नागरिकों ने पानी की गुणवत्ता, बोरिंग, पीएचई लाइन और पुराने नल कनेक्शनों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। जल कार्य एवं सीवरेज समिति प्रभारी प्रकाश शर्मा ने जल सुनवाई के दौरान मीडिया से कहा कि “गंभीर के पानी के आगे बिसलेरी का पानी भी फेल है।” उन्होंने कहा कि उज्जैन शहर में आज भी कई स्थानों पर 40 से 50 साल पुराने नल कनेक्शन मौजूद हैं, जिनकी मरम्मत और देखरेख पर लोग ध्यान नहीं देते। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि बिजली की केबल खराब हो जाए तो लोग 10 मिनट में उसे ठीक करवा लेते हैं, लेकिन सड़े-गले और टूटे नल कनेक्शनों की ओर कोई ध्यान नहीं देता। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब पानी की सप्लाई के दौरान या तुरंत बाद मोटर चालू कर दी जाती है, तो आसपास का दूषित पानी पाइप लाइन में खिंच जाता है, जिससे जल प्रदूषण की स्थिति बनती है। नागरिकों से अपील शर्मा ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि उन्होंने यह भी कहा कि यदि कहीं शिकायत आती है तो उसके पीछे मुख्य कारण टूटे नल कनेक्शन या शहर में चल रहे विकास कार्यों के दौरान हुई पाइप लाइन की क्षति होती है। जब मीडिया ने कहा कि बैठकों में बिसलेरी क्यों? सवाल पर गोलमोल जवाब दिया। जल सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठाया गया कि क्या अब शहर की सभी बड़ी बैठकों और कार्यक्रमों में बिसलेरी की जगह गंभीर का पानी पिलाया जाएगा। इस पर पहले तो जवाब टालने की कोशिश की गई, लेकिन बाद में कहा गया कि शहर के लोग वर्षों से गंभीर का पानी पी रहे हैं और अब तक इससे कोई गंभीर बीमारी सामने नहीं आई है। कस्तूरी कॉलोनी में गंभीर समस्या जल सुनवाई के दौरान कस्तूरी कॉलोनी के रहवासियों ने बोरिंग के पानी को लेकर गंभीर चिंता जताई। शिकायतकर्ता हर्षित टेकवानी ने बताया कि कॉलोनी में करीब 100 घर हैं और सभी पीएचई लाइन की मांग कर रहे हैं। बोरिंग के पानी से लोग घबरा गए हैं। बाल झड़ रहे हैं, बच्चों को एलर्जी हो रही है और मुझे पिछले 8 दिनों से सांस लेने में दिक्कत हो रही है। उन्होंने बताया कि उनका मकान कस्तूरी कॉलोनी में बने हुए 3 साल हो चुके हैं, लेकिन कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक पीएचई लाइन नहीं मिली। वही इंदिरा नगर के लोगों को जलभराव की समस्या और टंकी के सामने रह रहे लोग टंकी की मोटर की आवाज से बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। राजनीतिक दबाव में मिल जाती है स्वीकृति प्रकाश शर्मा ने स्वीकार किया कि ऐसी कई कॉलोनियां हैं, जहां राजनीतिक दबाव में स्वीकृति तो मिल जाती है, लेकिन बाद में बुनियादी सुविधाओं का अभाव रहता है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को आयुक्त के समक्ष रखा जाएगा, ताकि नई कॉलोनियों में पीएचई पानी अनिवार्य किया जा सके। इंदौर केस के बाद टंकियों की विशेष सफाई पीएचई इंजीनियर अभिषेक रोकड़े ने बताया कि इंदौर की घटना के बाद उज्जैन में सभी पानी की टंकियों की तत्काल सफाई के निर्देश दिए गए थे। इसके तहत टंकियों को मैन्युअल तरीके से साफ किया जा रहा है, ब्लीचिंग पाउडर का उपयोग किया जा रहा है और झाड़ू-पोछा लगाकर पूरी तरह सैनिटाइजेशन किया जा रहा है। जब टंकियों में मधुमक्खियों की मौजूदगी को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल इससे कोई समस्या सामने नहीं आई है, लेकिन भविष्य में किसी भी संभावित खतरे से पहले तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
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