दतिया16 घंटे पहले
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- शोपीस बनकर रह गए एटीएम, जरूरत पर लोगों को नहीं मिलता कैश, भटकने को मजबूर हैं लोग
दतिया जिले में 29 एटीएम मशीनें लगी हैं। इनमें से रात में 70 फीसदी एटीएम मशीनों पर ताला लग जाता है। कुछ एटीएम मशीनें बैंकों के साथ बंद हो जाते हैं तो कुछ शाम 7 बजे बंद हो जाते हैं। तीन-चार एटीएम ही खुले रहते हैं लेकिन उनमें कैश नहीं रहता है। केवल बैलेंस चैक करने की ही सुविधा रहती है। ऐसे में लोगों को तत्काल में रुपए निकालने के लिए एक से दूसरी जगह भटकना पड़ता है।
शहर की एटीएम मशीनें महज शोपीस बनकर रह गई हैं। खास बात यह है कि तत्कालीन कलेक्टर रोहित सिंह ने फरवरी माह में जब शहर का भ्रमण किया तो एटीएम के अंदर फैली गंदगी को लेकर खासी नाराजगी जताई थी। उन्होंने बैंक अफसरों से कहा था कि इनकी साफ सफाई कराओ और कैश डालो। समय पर कभी एटीएम में कैश नहीं रहता है, अगर कैश नहीं रहेगा तो इन्हें बंद कर दिया जाएगा।
अगले ही दिन से सभी एटीएम मशीनों की साफ सफाई कराई गई थी और तब से दो-तीन महीने तक एटीएम मशीनें रुपयों से भरी रहती थीं। लेकिन धीरे-धीरे फिर वही स्थिति शुरू हो गई। एटीएम मशीन तो हैं लेकिन पैसे नहीं रहते हैं।
जिले में लगे हैं 29 एटीएम
जिले में लगभग 56 बैंक की शाखाएं हैं। इन बैंकों के जिले में 29 एटीएम लगे हैं इनमें से अकेले दतिया शहर में ही 23 एटीएम हैं। सबसे ज्यादा सात एटीएम एसबीआई और पांच पीएनबी के हैं। इसके अलावा इलाहाबाद, आईसीआईसीआई, आईडीबीआई, कैनरा बैंक, पंजाब सिंध, एचडीएफसी, बीओआई समेत अन्य बैंकों के भी लगे हैं। सभी प्राइवेट बैंकों के एटीएम रात में बंद हो जाते हैं। आईडीबीआई, यूको बैंक पर तो बैंक बंद होने के साथ ही ताला डल जाता है।
बड़े बैंकों के एटीएम खराब, गंदगी व कचरे से भी हैं लोग परेशान
शहर के सबसे बड़े बैंक पंजाब नेशनल बैंक और भारतीय स्टेट बैंक के एटीएम ज्यादातर खराब ही नजर आते हैं। एटीएम के अंदर मवेशी तक बैठे देखे जाते हैं। अंदर गोबर, कचरा भरा रहता है। एटीएम के अंदर लगे एसी कभी भी चालू हालत में नहीं मिलते। सालों से खराब पड़े हैं। लेकिन न तो जिला प्रशासन इस तरफ ध्यान देता है और न ही बैंक प्रबंधन को कोई मतलब रहता है।
समय पर पैसा नहीं मिल पाता
कई बार ऐसा हुआ जब जरूरत पड़ने पर एटीएम पर गए तो पैसे ही नहीं निकले। एटीएम स्क्रीन कभी सॉरी तो कभी नो कैश का ऑप्शन दिखाई देता है। या फिर बाहर एटीएम खराब होने का पर्चा लगा होता है। कभी कभी तो उधार लेना पड़ जाता है।
दीपक यादव, बुंदेला कॉलोनी
पशु बैठते रहैं एटीएम में
शहर के सभी एटीएम खराब पड़े हैं। कभी भी गाय, बैल बैठे देखे जा सकते हैं। गांधी रोड पर लगा एसबीआई का एटीएम तो खंडहर बन गया है। लेकिन बैंक वाले ध्यान ही नहीं देते हैं।
मोहित दुबे, खातीबाबा कॉलोनी
अवकाश के दिनों में बढ़ जाती है परेशानी
वर्किंग दिनों में तो लोग एटीएम में पैसा न होने पर बैंक से पैसे निकाल लाते हैं। लेकिन जब सरकारी अवकाश होते हैं और बैंक बंद रहते हैं तब लोगों को तत्काल पैसे का प्रबंध करना मुश्किल हो जाता है। अगर लगातार तीन से चार दिन का अवकाश हो गया तो फिर लोगों को उधार लेकर ही काम चलाना पड़ता है।
अगर त्योहारी सीजन हो तो आमजन के साथ व्यापारी भी परेशान होते हैं। बड़े-बड़े भुगतान तो लोग मोबाइल से भी कर लेते हैं, लेकिन किराना दुकान, सब्जी मंडी या अन्य छोटा सामान खरीदने के लिए रुपयों की आवश्यकता होती है।