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Desi tomato chutney: विंध्य क्षेत्र के देसी टमाटर, जिन्हें टमाटरी कहा जाता है, खट्टे स्वाद और विटामिन सी के लिए प्रसिद्ध हैं. डॉक्टर आरपी परौहा और संतोष मिश्रा ने इसकी लोकप्रियता बताई है.
Desi tomato chutney : मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में देसी टमाटर अपनी खास खट्टी स्वाद पहचान के लिए ग्रामीण रसोई में बेहद लोकप्रिय हैं. स्थानीय बोली में इन्हें टमाटरी कहा जाता है. हाइब्रिड टमाटरों की तुलना में ये आकार में छोटे, गोल और अधिक रसीले होते हैं. इनमें अतिरिक्त मसाले डालने की जरूरत नहीं पड़ती.
आयुर्वेदिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर आरपी परौहा ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि देसी टमाटर का स्वाद इतना खट्टा होता है कि सिर्फ हरी मिर्च और हरा धनिया डाल देने से ही स्वादिष्ट सब्जी तैयार हो जाती है. इसे भूनकर भी खाया जाता है और कच्चा खाने का स्वाद भी लोगों को खूब पसंद आता है.
भरपूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता
पोषण के लिहाज से भी देसी टमाटर किसी खजाने से कम नहीं हैं. इनमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है, जो सर्दी के मौसम में इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है. यह टमाटर एक छोटी जंगली किस्म का होता है, जो कई बार खरपतवार की तरह अपने आप उग आता है. छोटे लाल या पीले रंग के ये टमाटर देखने में चेरी टमाटर जैसे लगते हैं, लेकिन स्वाद में कहीं ज्यादा खट्टे होते हैं.
देसी टमाटर का पौधा काफी लंबा होता
किसान संतोष मिश्रा बताते हैं कि देसी टमाटर का पौधा काफी लंबा होता है और इसकी बेल 10 फुट से भी अधिक बढ़ जाती है. इसे रस्सी या लकड़ी के सहारे बांधना जरूरी होता है, नहीं तो नीचे झुककर टूटने का खतरा रहता है. इसका छिलका पतला होने के कारण यह बेहद रसीला होता है. बाजार में देसी टमाटर की डिमांड हमेशा बनी रहती है. किसान बताते हैं कि हाइब्रिड टमाटर जहां 40 रुपये किलो बिकता है, वहीं देसी टमाटर 50 रुपये किलो तक आसानी से बिक जाता है. हालांकि, पतले छिलके के कारण इसे बड़े स्तर पर बेचने के बजाय स्थानीय बाजारों में ही बेचा जाता है.
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7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें