जबलपुर/मंडला. “मैं इकलौती बेटी हूं…. पिता का साया उठ चुका है, रविवार मां का उपवास था, मां को काफी मनाया… लेकिन वह नहीं मानी. हफ्ता पूरा होने का बोलकर काम पर गई. बोल रही थी, दो दिन और काम करूंगी, हफ्ता पूरा हो जाएगा, पैसे मिल जाएंगे. 26 जनवरी को मेला भरेगा. नाती को मेला कैसे घुमाऊंगी. नहीं पता था कि मां ऐसे दर्दनाक हादसे में मारी जाएगी और वापस लौट कर कभी नहीं आएगी…”
यह कहना उस बेटी का है, जिसने जबलपुर हिट एंड रन हादसे मां को खो दिया. लच्छो बाई उन महिला मजदूरों में से थीं, जा सड़क किनारे खाना खा रही थीं, जब बेकाबू क्रेटा कार ने उनको रौंद दिया था. लच्छो की इकलौती बेटी भगवंती मोबाइल में मां की तस्वीर देखकर बार-बार रो रही है. रोते-रोते गला बैठ चुका है, लेकिन अब भी एक ही जिद लगाकर बैठी है, मां मेरी बात आखिरी बार तो मान लेती… तब शायद ऐसा न होता, अब मेला कैसे जाएंगे?
दौड़ते-दौड़ते अस्पताल गई, मां नहीं मिली जिंदा
भगवंती ने बताया, फोन आया की मां का एक्सीडेंट हो गया है. दौड़ते-दौड़ते अस्पताल गई. जैसे ही अस्पताल पहुंची मां जिंदा नहीं मिली. पता चला कि दरिंदे ने मां को ऐसे कुचला कि संभलने का भी मौका नहीं मिला. कुछ घंटे इलाज चला और मां ने दम तोड़ दिया. मां मंडला के बम्होरी गांव से 45 किलोमीटर दूर जबलपुर काम पर जाती थी, जहां मजदूरी करने पर 230 रुपये मिलते थे.
गोंड बाबा का रखती थी उपवास, सिर्फ पानी पीती थी
बेटी ने बताया, मां रविवार और बुधवार को गोंड बाबा का उपवास रखती थी. उपवास के दिन सिर्फ पानी पीती थी. रोजाना की तरह मां सुबह-सुबह नहा धोकर काम पर निकली थी. मां को जाने से मना किया, लेकिन मां ने बात नहीं मानी. यही कहा, घर में बैठकर भी क्या करूंगी, काम पर जाऊंगी तो 2 पैसे भी मिलेंगे. 26 जनवरी को मेला लगेगा, पैसे काम में आएंगे. नाती-पोते को झूला भी झुलाना है. 2 दिन बाद हफ्ता पूरा होगा, फिर पैसे मिलेंगे.
7 साल पहले पिता का उठा साया
7 साल पहले लच्छो बाई के पति की मौत ही चुकी थी. घर में अकेले पड़ गई थी. तभी से लच्छो बाई ने अपने दामाद और बिटिया भगवंती को घर बुला लिया था. उन्होंने बताया, हम गरीब हैं, घर के सभी काम पर जाते थे. यदि काम नहीं करेंगे तब क्या खाएंगे? थोड़ी सी जमीन लालबर्रा में है, लेकिन उस जमीन में ढंग से खाने तक को नहीं होता है. पेट पालने के लिए सब कुछ करना पड़ता है.
ये है मामला…
दरअसल, बीते रविवार को जबलपुर हिट एंड रन मामले में पांच आदिवासी महिलाओं की मौत हो गई थी, जबकि 10 से ज्यादा महिलाएं घायल हैं. महिलाएं डिवाइडर किनारे जबलपुर में NH 30 में NHAI का काम कर रही थीं. दोपहर में जब खाना खा रही थी, तभी तेज रफ्तार कार चालक ने महिलाओं को कुचल दिया था और मौके से फरार हो गया था.