प्रदेश की नर्सिंग, पैरामेडिकल और मेडिकल शिक्षा व्यवस्था बेपटरी हो चुकी है। हालात ऐसे हैं कि 3 साल का कोर्स करने में छात्रों को 7 साल तक इंतजार करना पड़ सकता है। एमपी नर्सिंग काउंसिल और मेडिकल विश्वविद्यालय की लेटलतीफ का खामियाजा प्रदेशभर के करीब 42 हजार छात्र भुगत रहे हैं। सबसे गंभीर स्थिति जीएनएम में है। जीएनएम छात्रों ने 2022 में फर्स्ट ईयर में प्रवेश लिया। इसकी परीक्षा 2023 में होने की बजाय 3 साल देरी से अप्रैल 2025 में हुई। परीक्षा को एक साल होने को है, पर रिजल्ट नहीं आया। इसके बाद सेकंड और थर्ड ईयर में दो साल और लगेंगे। यानी 3 साल में पूरा होने वाला कोर्स 7 साल (2028) में पूरा होगा। पैरामेडिकल कोर्स के 2021-22 व 2022-23 बैच के छात्रों का अब तक रिजल्ट नहीं आया। वहीं 2023-24, 2024-25 बैच के छात्रों को परीक्षा का इंतजार है। ऐसे छात्रों का सत्र तीन साल पहले से ही लेट चल रहा है। मेडिकल विवि जबलपुर के अफसरों का कहना है प्रोफेसर समय पर ऑनलाइन कॉपी चेक नहीं कर रहे। इससे रिजल्ट में देरी हो रही है। लेट सत्र का असर: नौकरी के अवसर गवां रहे लेट सत्र और रिजल्ट में देरी से जीएनएम, पैरामेडिकल और मेडिकल कोर्स के छात्र समय पर पासआउट नहीं हो रहे। इस कारण वे सरकारी व निजी अस्पतालों की भर्तियों के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे। कई राज्यों में नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ की सीधी भर्ती हैं, लेकिन सर्टिफिकेट व रजिस्ट्रेशन न होने से वे अपात्र हैं। जिम्मेदारों के जवाब… कोर्ट के आदेश का इंतजार
जीएनएम फर्स्ट ईयर सत्र 2022-23 की परीक्षा मई 2025 में हाईकोर्ट के आदेश पर कराई गई थीं। इसलिए कोर्ट के आदेश के तहत ही रिजल्ट जारी किया जाएगा। – मुकेश सिंह, रजिस्ट्रार, एमपी नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल कॉपी जांचने में देरी है वजह
पैरामेडिकल के जिन कोर्स के रिजल्ट अटके हैं, उसकी बड़ी वजह प्रोफेसरों द्वारा समय पर मूल्यांकन न करना है। डीन को दो बार पत्र लिखा जा चुका है। – डॉ. आदित्य ठाकुर, परीक्षा नियंत्रक, मेडिकल विवि, जबलपुर एक्सपर्ट – डॉ. जयंत सोनवलकर, पूर्व कुलपति, भोज विवि, भोपाल एकेडमिक कैलेंडर के अनुसार एग्जाम व रिजल्ट घोषित किए जाएं मेडिकल कोर्स के एडमिशन लेट होते हैं। इससे पूरा कैलेंडर बिगड़ा हुआ है। लेकिन एमपी एनआरसी व मेडिकल यूनिवर्सिटी को हर कोर्स का एग्जाम व रिजल्ट का कैलेंडर जारी करना चाहिए। तभी व्यवस्था पटरी पर आ सकती है। अन्यथा छात्रों की 3 साल की डिग्री 7 साल में पूरी होगी। इसमें सुधार नहीं हुआ तो छात्र प्रवेश लेने से बचेंगे। जिसका असर शैक्षणिक संस्थानों पर पड़ेगा।
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