महाकाल मंदिर और महाकाल लोक परिसर में 70 दिन में एक हजार पंखुड़ियों सहित दस प्रकार के कमल के फूल लहलहाएंगे। इसके लिए शुक्रवार को कमल के फूल के विशेषज्ञ की मौजूदगी में परिसर में कमल रोपे गए हैं। यह फूल 70 दिन में परिपक्व होकर 150 दिन तक फूलों से लदे रहने का दावा किया जा रहा है।
वसंत पंचमी पर महालोक लोक में दुर्लभ प्रजाति के कमल लगाए गए। इनका रोपण वास्तु कमल के विशेषज्ञ प्रमोद गायकवाड़ ने किया। भास्कर से चर्चा में गायकवाड़ ने बताया कि देश का पहला ज्योतिर्लिंग होगा, जिसमें दस दुर्लभ प्रजातियों के कमल के फूल लहलहाएंगे। इसके अलावा पानी में गप्पी और मौली मछलियां छोड़ी गई हैं, जिससे पानी को साफ रखने में मदद मिलेगी। साथ ही 17 प्रजातियों की वाटर लिली भी लगाई है, जिससे मंदिर व लोक के सौंदर्यीकरण में मदद मिलेगी। इन 10 प्रकार के कमल से सजेगा परिसर 1. सहस्त्रदल : एक हजार पंखुड़ियां रहेंगी।
2. लोंग कांचा : सफेद रंग का रहेगा।
3. ड्रॉप ब्लड : सूर्ख लाल रंग का होगा।
4. विष्णु कमल : यह ऑफ व्हाइट रहेगा।
5. लक्ष्मी कमल : देसी प्रजाति का होगा।
6. अष्ट दल : आठ पंखुड़ियां रहेंगी।
7. कावेरी : 850 पंखुड़ियां का होगा।
8. रेड पियोनी : लाल रंग का 900 पंखुड़ियां होंगी।
9. ग्रीन एप्पल : कच्चा सेवफल की तरह दिखेगा।
10. पिंक क्लाउड : गुलाबी रंग का 450 पंखुड़ियां वाला फूल। मंदिर और महाकाल लोक में निर्माण ऐसे करें कि भक्तों को असुविधा न हो
श्री महाकालेश्वर मंदिर के आंतरिक एवं बाहरी परिसर के साथ महाकाल महालोक परिसर में किए जा रहे कामों को इस तरह किए जाएं कि दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने यह बात कही। वे शुक्रवार को महाकालेश्वर मंदिर और महालोक में किए जा रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर रहे थे। उन्होंने दर्शन मार्ग, प्रवेश-निकास व्यवस्था, सुरक्षा एवं स्वच्छता पर ध्यान देने पर जोर दिया।
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