राजा ने 142 साल पहले 1 लाख में बनवाया था हवा बंगला, दूर से दिखता ‘जहाज’ जैसा

राजा ने 142 साल पहले 1 लाख में बनवाया था हवा बंगला, दूर से दिखता ‘जहाज’ जैसा


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Indore News: इसकी बनावट में मराठा और राजपूताना शैली का मिश्रण साफ देखने को मिलता है. ज्यादातर चीजें इटालियन स्टाइल में बनाई गई, इसलिए कई लोग इसे इटालियन बंगला भी कहते हैं.

इंदौर. मध्य प्रदेश के इंदौर के पश्चिमी छोर पर स्थित हवा बंगला मराठा और होलकर कालीन शासन के गौरवशाली इतिहास का जीता जागता उदाहरण है. जंगल के बीचोंबीच स्थित यह इमारत शिवाजी राव होल्कर ने बनवाई थी, जो किसी महल से कम नहीं है. यह चारों तरफ से हवादार है. आज से तकरीबन 142 साल पहले साल 1884 में इस इमारत को शिवाजी राव होल्कर ने एक लाख रुपए में बनवाया था ताकि वह अपने परिवार के साथ यहां आराम कर सकें और खाली समय व्यतीत कर सकें.

उस समय यहां जंगल हुआ करता था तो शिकार के लिए भी वह यहीं आया करते थे. इसकी ऊंचाई और वास्तुकला ऐसी थी कि चिलचिलाती गर्मी में भी यह अंदर से एकदम ठंडा रहता था, इसीलिए स्थानीय लोगों ने इसे हवा बंगला कहना शुरू कर दिया. आप इसका अंदाजा इस बात से भी लगा सकते हैं कि एक ही हॉल में पहली मंजिल पर यहां 12 दरवाजे हैं.

राजपूताना और मराठा शैली का मिश्रण
इसकी बनावट में राजपूताना और मराठा शैली का मिश्रण साफ देखने को मिलता है. ज्यादातर चीजें इटालियन स्टाइल में बनाई गई है, इसलिए कई लोगों द्वारा इसे इटालियन बंगला भी कहा गया. दूर से खड़े होकर पूर्व से पश्चिम की तरफ जब देखते हैं, तो यह किसी जहाज की तरह दिखाई देता है. तकनी के रूप से इसे हवादार बनाया जा रहा था, इसीलिए इसे जहाज का डिजाइन दिया गया. यह दूर से किसी जहाज जैसा दिखता है. बड़े झरोखे और ऊंची छतों के कारण यह प्राकृतिक रूप से एयर-कंडीशंड महसूस होता था‌. इंदौर में एक ऊंचे टाले पर होने की वजह से यहां से सब साफ दिखाई देता था, साथ ही शुद्ध हवा भी मिलती थी.‌

भीषण गर्मी में एकदम ठंडा
अंदर प्रवेश करते ही आपको खुले कालीन दरवाजे और लकड़ी की सीढ़ियां दिखाई देती हैं. वहीं पहली मंजिल पर दोनों तरफ खुले बरामदे हैं, जिसके बीच में एक बड़ा सा हॉल है. इस हॉल को ऐसे बनाया गया है कि चारों तरफ से हवा अंदर और बाहर जा सके. इसी हॉल में करीब 12 दरवाजे हैं. इसी वजह से भीषण गर्मी में भी यह एकदम ठंडा रहता था.

म्यूजियम बनाने की भी मांग
कई सालों तक हवा बंगला का संरक्षण नहीं हुआ, जिससे कई जगह से इसका क्षरण भी हो चुका है. अब नगर निगम इसे अपने जोनल कार्यालय के रूप में इस्तेमाल करता है, जिससे इसका रखरखाव हो रहा है. इंदौर की धरोहर के रूप में कई लोग इसे म्यूजियम बनाने की भी मांग करते हैं.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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