Balaghat Naxal Surrender: मध्य प्रदेश के नक्सल इतिहास में 6 दिसंबर की शाम सुरक्षा बलों और प्रशासन के लिए किसी मील के पत्थर से कम नहीं थी. इसी शाम सशस्त्र माओवाद को ऐसा झटका लगा, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. एमएमसी जोन के केबी डिवीजन का कुख्यात नक्सली कबीर और उसके साथ 10 माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़ने को तैयार हो गए. यह सरेंडर अचानक नहीं हुआ, इसके पीछे भरोसे, संवाद और एक वीडियो की बड़ी कहानी छिपी है.
जब एक बीट गार्ड बना गेम चेंजर
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम भूमिका निभाई एक साधारण से बीट गार्ड गुलाब सिंह उइके ने. नक्सली दरअसल छत्तीसगढ़ में सरेंडर करना चाहते थे, लेकिन गुलाब सिंह ने उन्हें एक वीडियो दिखाया. यह वीडियो था बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीना का. वीडियो देखने के बाद नक्सलियों ने मध्य प्रदेश शासन पर भरोसा जताया और बालाघाट में सरेंडर करने का फैसला लिया.
सीएम के सामने हथियार छोड़े, संविधान थामा
7 दिसंबर को नक्सलियों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने अपने हथियार सरेंडर किए और हाथों में संविधान लिया. यह पल सिर्फ सरेंडर नहीं था, बल्कि हिंसा से लोकतंत्र की ओर लौटने का संदेश भी था.
तीन दशक में पहली बार नक्सल मुक्त बालाघाट
लोकल 18 से बातचीत में कलेक्टर मृणाल मीना ने बताया कि बालाघाट में नक्सलवाद का खत्म होना पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त सफलता है. दूरस्थ इलाकों में लगातार कैंप, सरेंडर पॉलिसी का प्रचार और नक्सलियों से संवाद इन सबका असर दिखा. यही वजह रही कि नक्सलियों का प्रशासन पर भरोसा बढ़ा और उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया.
नक्सल खत्म, लेकिन असली चुनौती अब शुरू
कलेक्टर कहते हैं कि नक्सलवाद खत्म होना राहत की बात है, लेकिन असली चुनौती अब विकास है. सड़क, पुल, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएं और रोजगार इन सब पर तेज़ी से काम करना जरूरी है. पहले नक्सल डर की वजह से कॉन्ट्रैक्टर और फील्ड स्टाफ काम नहीं कर पाते थे, अब परसवाड़ा, बैहर, बिरसा और लांजी जैसे इलाकों में भी विकास उसी रफ्तार से होगा.
डेवलपमेंट के साथ भ्रष्टाचार पर भी नजर
हर विकास कार्य की मॉनिटरिंग, क्वालिटी चेक और शिकायतों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है. सिर्फ इन्फ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, बल्कि स्कूलों में पढ़ाई और मेडिकल सेवाओं पर भी फोकस है. रोजगार के लिए लोकल और बाहरी कंपनियों को बालाघाट लाया जा रहा है, ताकि युवाओं को यहीं काम मिल सके.
नक्सल मुक्त बालाघाट में गणतंत्र दिवस की नई खुशी
करीब तीन दशक बाद नक्सल मुक्त बालाघाट में गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है. इसे लेकर कलेक्टर ने बालाघाटवासियों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह गणतंत्र दिवस देशभक्ति और भरोसे से भरा होगा.
कौन हैं IAS मृणाल मीना
राजस्थान निवासी मृणाल मीना ने NALSAR यूनिवर्सिटी हैदराबाद से कानून की पढ़ाई की. UPSC में 174वीं रैंक हासिल कर IAS बने. बालाघाट उनकी पहली कलेक्टर पोस्टिंग है. इससे पहले वे उज्जैन में जिला पंचायत सीईओ रह चुके हैं.