मोहन ढाकले/बुरहानपुर. किस्मत हर किसी पर एक जैसी मेहरबान नहीं होती, लेकिन जो लोग हालात से लड़ना जानते हैं, वही मिसाल बनते हैं. मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले के नेपानगर क्षेत्र में रहने वाले लोकेश कटारे की कहानी कुछ ऐसी ही है, जो दिल को छू जाती है.
लोकेश का जन्म ही एक हाथ के बिना हुआ था. बचपन से ही उन्हें हर काम में दिक्कतों का सामना करना पड़ा. स्कूल जाना, कॉपी पकड़ना, रोजमर्रा के काम सब कुछ उनके लिए चुनौती से कम नहीं था. ऊपर से घर की हालत भी ज्यादा अच्छी नहीं थी. माता-पिता मजदूरी करते हैं और उसी से परिवार का गुजारा चलता है.
पढ़ाई नहीं छोड़ी, सपनों से समझौता नहीं किया
इन तमाम परेशानियों के बावजूद लोकेश ने पढ़ाई कभी नहीं छोड़ी. फिलहाल वह बीकॉम की पढ़ाई कर रहे हैं. उनका सपना है कि वे चार्टर्ड अकाउंटेंट बनें और अपने माता-पिता को इस मेहनत भरी जिंदगी से बाहर निकालें. पढ़ाई के साथ-साथ वह काम भी करते हैं ताकि अपने खर्च निकाल सकें.
लोकेश बताते हैं कि उन्होंने कई प्रतियोगी परीक्षाएं भी दी हैं. भले ही अभी तक सफलता हाथ नहीं लगी हो, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. उनका साफ कहना है कि असफलता से डरना नहीं चाहिए, कोशिश करते रहना ही असली जीत है.
आर्टिफिशियल हाथ बना उम्मीद की नई वजह
एक हाथ न होने की वजह से लोकेश को सबसे ज्यादा परेशानी काम करने और आने-जाने में होती थी. मोटरसाइकिल चलाना तक उनके लिए संभव नहीं था. आर्टिफिशियल हाथ लगवाना चाहते थे, लेकिन करीब एक लाख से डेढ़ लाख रुपए का खर्च उनके परिवार के लिए बहुत बड़ा था.
जब यह बात क्षेत्र के समाजसेवियों तक पहुंची, तो मदद के हाथ आगे आए. कोलकाता की महावीर संस्था और बुरहानपुर की करीब छह सामाजिक संस्थाओं ने मिलकर लोकेश को आर्टिफिशियल हाथ लगवाने में सहयोग किया.
अब आत्मविश्वास भी बढ़ा, सपने भी
आर्टिफिशियल हाथ लगने के बाद लोकेश की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है. अब उनका हाथ मूवमेंट करने लगा है. वे मोटरसाइकिल भी चला पा रहे हैं और कई काम खुद कर लेते हैं. लोकेश कहते हैं कि पहले बहुत दिक्कतें थीं, लेकिन अब आत्मविश्वास बढ़ गया है. मैं और मेहनत करूंगा और अपना सपना जरूर पूरा करूंगा. आज लोकेश उन युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो हालातों के आगे हार मान लेते हैं. उनकी कहानी बताती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी कमी रास्ता नहीं रोक सकती.