Success Story: यूं तो महुआ का सबसे अधिक उपयोग देसी शराब बनाने में होता है. यही कारण है कि पौष्टिक महुआ सब जगह बदनाम है. खासकर MP में सीधी जिले के तिलवानी पोस्ट बरम बाबा गांव में कभी महुआ वाली शराब बनाने की वजह से पहचाना जाता था. लेकिन अब इसी गांव में सास-बहू की सोच ने महुआ की तस्वीर बदल दी है. ग्राम तिलवानी की रहने वाली चंद्रावती सिंह गौड़ सहायता समूह राज लक्ष्मी बंधन केंद्र गांधी ग्राम की सक्रिय सदस्य हैं. पहले उनकी सास महुआ से देसी शराब बनाती थीं. यह उस समय की मजबूरी थी. लेकिन, समय बदला और उसी महुआ को नई पहचान मिली. चंद्रावती ने महुआ से अचार बनाने का प्रयोग शुरू किया. यह प्रयोग सुपरहिट हो गया. आज गांव की महिलाओं के लिए यही कमाई का जरिया बन चुका है. स्वाद और गुणवत्ता के कारण इसकी मांग सीधी जिले तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि आसपास के कई जिलों में भी इसकी सप्लाई होने लगी. जिससे गांव की महिलाओं को नियमित आमदनी मिल रही है.