विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू की जा रही नई नीति के विरोध में मंगलवार को देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) इंदौर परिसर में छात्रों और सामाजिक संगठनों की ओर से शांतिपूर्ण एवं संगठित विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदर्शन आरएनटी मार्ग स्थित व
.
आयोजकों का कहना है कि यह आंदोलन छात्र-विरोधी प्रावधानों और शिक्षा व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों के खिलाफ है। उनका दावा है कि प्रस्तावित नियम छात्रों के अधिकारों और भविष्य से जुड़े मुद्दों को प्रभावित कर सकते हैं।
प्रदर्शन में आने की अपील
छात्र नेता राहुल सिंह जादौन और शुभम सिंह राजपूत ने प्रदर्शन में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और समर्थकों के शामिल होने की अपील की है। आयोजन से जुड़े प्रतिनिधियों ने इसे शिक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक आवाज बताया है।
यूएन में भारत के दलितों की स्थिति दूसरे देशों से बेहतर बताने वाली इंदौर की स्कॉलर डॉ. रोहिणी घावरी ने सोशल मीडिया पर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि
UGC Promotion of Equity Regulations 2026 का मकसद सराहनीय है। कैंपस पर SC/ST/OBC छात्रों को जातिगत भेदभाव से बचाना, ये संवैधानिक समानता की दिशा में जरूरी कदम है, लेकिन सच्ची इक्विटी सबके लिए होनी चाहिए !!

ये मांग/सवाल की जा रही
- Equity Committees में सभी वर्गों (General सहित) का समान प्रतिनिधित्व !
- झूठी/दुरुपयोग शिकायतों पर सख्त दंड ( draft में था, final में क्यों हटाया ?)
- हर छात्र के लिए fair inquiry और due process.
- भेदभाव किसी तरफ न रहे – न SC/ST/OBC को इग्नोर, न General को डर।
- समानता बढ़ाओ, विभाजन खत्म करो !
- देश के सभी छात्रों का भविष्य सुरक्षित करो !
दावा-भेदभाव पूरी तरह खत्म हो जाएगा
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 13 जनवरी को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस’ नाम से एक नोटिफिकेशन जारी किया। जिसे 15 जनवरी से देशभर के यूनिवर्सिटी-कॉलेज में लागू कर दिया गया। सरकार का दावा है कि इससे शैक्षणिक संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, नस्ल, जन्म स्थान, विकलांगता के आधार पर होने वाला भेदभाव पूरी तरह खत्म हो जाएगा। UGC के नए नियम के मुताबिक, हर यूनिवर्सिटी-कॉलेज को EOC बनाना जरूरी है।
भेदभाव की परिभाषा सवर्ण छात्रों के खिलाफ
नए नियमों में भेदभाव की परिभाषा में SC/ST/OBC महिलाओं, विकलांगों को शामिल किया गया है, जबकि सवर्ण या जनरल कैटेगरी के छात्रों को भेदभाव से पीड़ित लोगों के दायरे में शामिल नहीं किया गया है। इससे सवर्ण छात्र ‘स्वाभाविक अपराधी’ की तरह देखे जाएंगे। नियमों के मुताबिक, वे भेदभाव के आरोपी तो हो सकते हैं, लेकिन पीड़ित नहीं हो सकते।
जातीय भेदभाव की शिकायत पर कार्रवाई के प्रावधान
- कॉलेजों में ईक्वल अपॉरच्युनिटी सेंटर यानी EOC बनेंगे। ये कॉलेज कैंपस में पिछड़े और वंचित लोगों को शैक्षिक, वित्तीय और दूसरे मामलों में सलाह देंगे और उनके साथ भेदभाव से जुड़ी शिकायतों का समाधान करेंगे।
- कॉलेज जातीय भेदभाव को रोकने के लिए समाज, मीडिया, जिला प्रशासन और NGO, स्टूडेंट्स और अभिभावकों के साथ मिलकर काम करेगा और कानूनी मदद के लिए जिले और राज्य की लीगल अथॉरिटीज यानी कोर्ट्स का सहयोग लेगा।
- EOC के तहत हर कॉलेज को एक इक्विलिटी कमेटी यानी समता समिति बनानी होगी। इसके अध्यक्ष कॉलेज के प्रमुख होंगे। इस कमेटी में SC/ST, OBC, दिव्यांग, महिलाएं शामिल होंगी। इनका कार्यकाल दो साल का होगा। विशेष आमंत्रित सदस्यों का कार्यकाल एक साल का होगा।
- कॉलेज में एक ‘इक्विटी स्क्वाड’ नाम की छोटी संस्था भी बनाई जाएगी, जिसका काम कॉलेज में निगरानी करना और भेदभाव को रोकना होगा।
- भेदभाव की शिकायत आने पर इक्विलिटी कमेटी को 24 घंटे के अंदर बैठक करके शुरुआती कार्रवाई करनी होगी और 15 दिन के अंदर कॉलेज के प्रमुख को इसकी रिपोर्ट देनी होगी। कॉलेज के प्रमुख को 7 दिनों के अंदर आगे की कार्रवाई शुरू करनी होगी।
- EOC को हर 6 महीने में कॉलेज के प्रमुख को अपने कामकाज की रिपोर्ट देनी होगी। जबकि जातीय भेदभाव को लेकर कॉलेजों को UGC को सालाना रिपोर्ट देनी होगी।