नर्मदापुरम कलेक्ट्रेट में मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान उस वक्त हड़कंप मच गया, जब सिवनी मालवा के दो सगे भाई अपनी मां के साथ अर्धनग्न हालत में हाथों में कफन और माला लेकर पहुंचे। ‘राम नाम सत्य है’ का उद्घोष करते और झांझ बजाते हुए पहुंचे इन युवकों की शिकायत है कि उनके खेत के पास सरकारी जमीन पर पीएम आवास बनने से पानी की निकासी और रास्ता बंद हो गया है। प्रभारी कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन ने उनकी समस्या सुनने के बाद मामले की जांच के लिए जिले से एक दल सिवनी मालवा भेजने के निर्देश दिए हैं। युवकों को अर्धनग्न हालत में आते देख एसडीएम जय सोलंकी और तहसीलदार सरिता मालवीय तत्काल कलेक्ट्रेट बिल्डिंग से बाहर आए। उन्होंने दोनों भाइयों और उनकी मां को रोका और उनकी बात सुनी। युवक केवल कलेक्टर को अपनी परेशानी बताने पर अड़े रहे। अधिकारियों ने उन्हें कलेक्टर से मिलवाने का आश्वासन देकर कपड़े पहनने को कहा। इसके बाद तीनों को प्रभारी कलेक्टर (सीईओ) हिमांशु जैन से मिलवाया गया। सरकारी जमीन पर पीएम आवास बनने से विवाद जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन ने बताया कि पीड़ित सिवनी मालवा तहसील क्षेत्र से आए थे। उनका निजी खेत है, जिसके बाजू में सरकारी जमीन और सरकारी रास्ता है। कई साल से शासकीय भूमि खाली होने से पीड़ित वहां से आवागमन करते थे और पानी की निकासी भी होती थी। वर्तमान में उस शासकीय भूमि पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पट्टे बांटकर मकान बना दिए गए हैं। अपर कलेक्टर कोर्ट में चल रहा केस पीड़ितों का कहना है कि मकान बन जाने से उनका रास्ता और पानी की निकासी बंद हो गई है। उनकी मांग है कि पानी की निकासी के लिए उस जमीन को खाली कराया जाए। यह मामला अपर कलेक्टर कोर्ट में विचाराधीन है, जिसका फैसला आना बाकी है। सीईओ ने बताया कि उनकी संतुष्टि और वास्तविक स्थिति जानने के लिए जिला स्तर से तहसीलदार को मौके पर जाकर रिपोर्ट बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
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