कमलेश्वर धाम में बरगद से प्रकट हुए शिव! तांत्रिक ने पेड़ पर मारा चाकू तो…

कमलेश्वर धाम में बरगद से प्रकट हुए शिव! तांत्रिक ने पेड़ पर मारा चाकू तो…


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Kamleshwar Dham History: कमलेश्वर धाम शिवपुरी जिले में उत्तर प्रदेश की सीमा से लगता हुआ है. यही कारण है कि मध्य प्रदेश के साथ-साथ यूपी से भी बड़ी संख्या में भक्त यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

शिवपुरी. मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित कमलेश्वर धाम आस्था, चमत्कार और मान्यताओं का ऐसा केंद्र है, जिसकी कहानी सुनकर हर कोई आश्चर्यचकित रह जाता है. यह कोई साधारण शिव मंदिर नहीं है. मान्यता है कि यहां भगवान शिव की प्राण-प्रतिष्ठा नहीं की गई बल्कि भोलेनाथ स्वयं एक बरगद के पेड़ से प्रकट हुए थे. इसी कारण यह धाम वर्षों से श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रतीक बना हुआ है. माना जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन और पूरी श्रद्धा के साथ बाबा के दरबार में अर्जी लगाता है, वह कभी खाली हाथ नहीं लौटता. दूरदराज से हजारों श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं और बाबा कमलेश्वर उनकी झोली भर देते हैं.

कमलेश्वर धाम शिवपुरी जिले में उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा हुआ है. यही वजह है कि मध्य प्रदेश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं. रोजाना सैकड़ों भक्त बाबा भोलेनाथ के दर्शन कर जलाभिषेक करते हैं और अपनी मनोकामनाएं रखते हैं. मंदिर के पुजारी सुखदेव शर्मा लोकल 18 को बताते हैं कि यहां स्थापित शिव स्वरूप कोई सामान्य प्रतिमा नहीं है. यह स्वरूप उसी बरगद के पेड़ से स्वयं प्रकट हुआ था, इसलिए इसे अत्यंत चमत्कारी माना जाता है. वर्षों से चली आ रही मान्यता के अनुसार, जिसने भी सच्चे मन से यहां अर्जी लगाई, उसकी मनोकामना जरूर पूरी हुई है. भक्तों का विश्वास है कि बाबा के दरबार से आज तक कोई भी निराश होकर नहीं लौटा.
खुद चलकर आई थीं गंगा मैया
कमलेश्वर धाम से जुड़ी एक और चमत्कारी कथा श्रद्धालुओं के बीच बेहद प्रचलित है. माना जाता है कि मंदिर के महंत रोजाना गंगा स्नान के लिए प्रयागराज जाया करते थे. एक बार गंगा मैया ने उनसे कहा कि आप रोज इतनी दूर क्यों आते हैं, अपना कमंडल यहीं छोड़ जाइए, मैं स्वयं आपके धाम आ जाऊंगी. इसके बाद महंत ने प्रयागराज के गंगा तट पर अपना कमंडल छोड़ दिया. जब वह वापस कमलेश्वर धाम पहुंचे, तो वही कमंडल वहां पहले से मौजूद मिला. तभी से यह मान्यता बनी कि गंगा मैया स्वयं प्रयागराज से चलकर कमलेश्वर धाम आई थीं. इसी कारण यहां गंगा स्नान का भी विशेष महत्व माना जाता है.

बरगद से प्रकट हुए भोलेनाथ
मान्यता है कि जिस बरगद के पेड़ से भगवान शिव प्रकट हुए थे, उसे एक समय काटने का प्रयास किया गया. पहले दिन पेड़ पर अचानक डालें लगी मिलीं, जिससे लोग डर गए. इसके बावजूद एक तांत्रिक ने छुरा मारकर उस बरगद को काट दिया. कहा जाता है कि अगले ही दिन वह विशाल बरगद पूरी तरह सूख गया और उस तांत्रिक का पूरा खानदान तबाह हो गया. इस घटना के बाद से इस स्थान को और भी अधिक चमत्कारी माना जाने लगा.

टस से मस नहीं हुई प्रतिमा
पुजारी सुखदेव शर्मा बताते हैं कि पहले यहां कोई मंदिर नहीं था, सिर्फ वही बरगद का पेड़ था, जिसपर लोग जल अर्पित करते थे. एक दिन एक सेठ यहां पहुंचे और उन्होंने बरगद के भीतर स्वयं भगवान शिव को विराजमान देखा. इसके बाद गहोई समाज के सहयोग से मंदिर का निर्माण कराया गया. मंदिर को इस तरह बनाया गया कि अंदर 16 दरवाजे रखे गए ताकि बरगद की डालियां बाहर निकल सकें. जब लोगों ने भगवान की प्रतिमा को हटाने का प्रयास किया, तो वह टस से मस नहीं हुई. अंततः उसी स्थान पर मंदिर बना दिया गया, जिसे आज कमलेश्वर धाम के नाम से जाना जाता है.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.



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