जबलपुर में मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग और उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी द्वारा आयोजित दो दिवसीय घुंघरू समारोह का गुरुवार को समापन हो गया। जिला प्रशासन जबलपुर के सहयोग से हुए इस भारतीय शास्त्रीय नृत्य केंद्रित समारोह के दूसरे दिन तीन नृत्य प्रस्तुतियां दी गईं। समारोह के दूसरे दिन की पहली प्रस्तुति भैरवी विश्वरूप एवं उनके साथियों द्वारा कथक नृत्य समूह की थी। इसमें जयपुर घराने की बंदिश ‘काली परण’ को खंड जाति में प्रस्तुत किया गया। इसके बाद ‘परमेलू’ रचना में तबला, पखावज, पशु-पक्षियों की आवाजों और प्राकृतिक ध्वनियों का समावेश किया गया। भाव पक्ष में लखनऊ घराने के प्रणेता पंडित बिंदादिन महाराज की रचना ‘निरतत ढंग…’ अष्टपदी पर भावाभिनय प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति का समापन द्रुत लय की गीत रचना ‘त्रिवट’ से हुआ, जिसकी रचना, नृत्य संरचना और संगीत संरचना जयपुर घराने के गुरु पंडित राजेंद्र गंगानी ने की है। इस प्रस्तुति में आकांक्षा आठले, आरुषि बक्शी, सुहानी कुचनकर, सौम्या चौरसिया, परिधि जैन, अंशिका विश्वकर्मा, अदिति ठाकुर और अक्षदा पहाड़िया ने पढ़ंत एवं नृत्य में सहयोग किया। संगत में तबले पर अनिरोध मेहरा, हारमोनियम व गायन में आयुष मेहरा और सरोद पर सजल सोनी ने साथ दिया। दूसरी प्रस्तुति अरुक्शा नायक एवं उनके साथियों द्वारा भरतनाट्यम समूह नृत्य की थी। ‘शिवोहम’ से शुरू हुई इस प्रस्तुति में भगवान शिव की चेतना को नाद, ताल और स्पंदन के माध्यम से दर्शाया गया। इसमें बताया गया कि ताल के बिना नृत्य संभव नहीं, वैसे ही शिव-तत्व के बिना जीवन की गति नहीं। शिव पंचाक्षर स्तोत्र के माध्यम से नटराज के तांडव और सौम्य स्वरूप का भावाभिनय प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति का समापन अर्धनारीश्वर स्वरूप की अभिव्यक्ति के साथ हुआ, जिसमें शिव-शक्ति के समन्वय द्वारा सृष्टि के संतुलन और पूर्णता का संदेश दिया गया। इस नृत्य का निर्देशन कामना नायक ने किया था, जबकि ताल रचना तंजावूर आर. केशवन की थी।
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