श्याेपुर2 मिनट पहले
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- पिछले साल से 543 मिमी कम बारिश, प्रशासन ने अभी नहीं बनाया सूखाग्रस्त घोषित करने का प्रस्ताव
माैसम विभाग ने 30 सितंबर काे मानसून विदा हाेने की औपचारिक घोषणा कर दी है। पिछले साल रिकार्ड तोड़ बारिश के बाद इस बार मानसून बेरुखी से अल्पवर्षा का दंश देकर जिलेवासियों के माथे पर चिंता की लकीर छोड़ गया है। 1 जून से 30 सितंबर तक मानसून सत्र के दाैरान जिले में महज 567.5 मिलीमीटर बारिश हुई। जबकि गत वर्ष इस अवधि में 1092 मिमी वर्षा हो गई थी। इस प्रकार पिछले साल की तुलना में 543 मिमी बारिश कम हुई है।
जिले में सामान्य वार्षिक औसत बारिश 822 मिमी हाेती है। लेकिन इस मानसून सत्र में काेटे से 30 फीसदी बारिश कम हुई है। मौसम विशेषज्ञों ने आने वाले दिनों में इस 30 फीसदी बारिश की भरपाई होने की संभावना नगण्य बताई है। यह जिलावासियों के लिए काफी चिंताजनक पहलू है। कम बारिश का असर खरीफ के साथ ही रबी फसलाें पर दिख रहा है। किसानों ने जिले में 16 हजार हेक्टेयर में बाजरा की फसल काटकर तैयार कर ली है। जबकि 25 हजार हेक्टेयर साेयाबीन, 18 हजार हेक्टेयर उड़द, 12 हजार हेक्टेयर मूंग की कटाई का काम धीरे- धीरे रफ्तार पकड़ने लगा है।
किसानों की मानें ताे पैदावार औसत से 30 से 50 फीसदी तक कम निकल रही है। वहीं जमीन में नमी खत्म हाेने के कारण जिले में अभी तक सरसों की बाेवनी शुरू नहीं हाे पाई है। जिलेभर में 42 हजार हेक्टेयर रकबे में सरसों की बाेवनी पर संशय की स्थिति बन गई है। कृषि वैज्ञानिक खेत में पलेवा करके सरसों का बीज डालने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन सभी नहरें बंद हैं। कम बारिश के कारण जिले में जल संसाधन विभाग के सभी बांध और तालाब खाली रह गए हैं। आवदा कमांड क्षेत्र में रबी सीजन में गेहूं की सिंचाई के लिए एक पानी में कटाैती हाेने की संभावना है।
जबकि चंबल दाहिनी मुख्य नहर में 15 अक्टूबर तक सफाई का काम हाेना है। रबी सीजन के लिए चंबल की नहराें में जल प्रदाय इस माह के अंत तक शुरू हाे सकता है। पूरा जिला सूखाग्रस्त घोषित हाेने की उम्मीद लाेग लगाए बैठे हैं लेकिन जिला प्रशासन की ओर से अभी सूखे से निपटने से निपटने की काेई तैयारी नहीं दिख रही है। सूखाग्रस्त घोषित करने के लिए प्रस्ताव शासन काे नहीं भेजा है। कृषि विभाग के उप संचालक पी गुजरे का कहना है कि 30 फीसदी कम बारिश के असर से खरीफ फसलाें की पैदावार में कमी का पता फसल कटाई प्रयोग के नतीजे आने पर ही चलेगा।
किसान बोले- खरीफ की पैदावार और रबी की बोवनी का घटेगा रकबा
मानसून सत्र में केवल 70 फीसदी बारिश होना किसानों के लिए चिंता का कारण बन गया है। किसान लोकेंद्रसिंह गुर्जर ने बताया कि बाजरा का उत्पादन औसत से आधा रह गया है। साेयाबीन, उड़द, तिली की पैदावार में भी किसानों के मुनाफे पर चाेट पड़ गई है। रामअवतार मीणा, बजरंग लाल सुमन, देवीशंकर सुमन, रामप्रसाद यादव, बद्रीप्रसाद कुशवाह ने बताया कि बारिश की कमी से जमीन में नमी खत्म हाेने की वजह से सरसाेें की बाेवनी शुरू नहीं हाे सकी है। रबी फसल की बोवनी का रकबा घट सकता है। नवंबर में धान की कटाई के बाद गेहूं की बाेवनी लेट हाेने से उत्पादन कमजोर रह सकता है।
1 जून से 30 सितंबर तक जिले में 567.5 मिमी बारिश, सबसे कम विजयपुर में
जिलें में 1 जून से 30 सितंबर तक मानसून सत्र के दाैरान कुल 567.5 मिमी औसत बारिश रिकार्ड की गई है। अधीक्षक भू – अभिलेख नाथूराम सखवार ने बताया कि तहसील श्योपुर में 705.5 मिमी, बड़ौदा में 569.5 मिमी,कराहल में 529 मिमी, विजयपुर में 511.6 मिमी और वीरपुर में 522 मिमी बारिश हुई है।
जिले को सूखाग्रस्त घाेषित करने का अभी कोई प्रस्ताव नहीं
जिले में 30 फीसदी बारिश कम हाेने से खरीफ और रबी फसल पर असर पड़ना स्वाभाविक है। जिले में 42 हजार हेक्टेयर में सरसों की बाेवनी का टारगेट है। वहीं जिले काे सूखाग्रस्त घाेषित करने का अभी प्रशासन की ओर से काेई प्रस्ताव नहीं है।
पी गुजरे, उप संचालक कृषि विभाग श्याेपुर
जिले के बांध व तालाब रह गए खाली
मानसून में कम बारिश होने से जिले के तमाम सतही जलस्रोत खाली रह गए हैं। मध्यम सिंचाई परियेाजना का आवदा बांध क्षमता से 10 फीट कम भरा है। अपर ककैटाे बांध भी 89 फीसदी भरा है। वीरपुर तालाब सहित अधिकांश तालाब पूरे नहीं भरे हैं। इससे रबी फसलाें की सिंचाई पर संकट के साथ ही इलाके में दिनोंदिन गिरता भूजल स्तर जिलावासियों की चिंता बढ़ा रहा है।