IPS Story, MP News: मध्य प्रदेश के सीनियर IPS अधिकारी राजा बाबू सिंह इन दिनों खूब चर्चा में हैं. गणतंत्र दिवस के मौके पर उन्होंने एक मदरसे के छात्रों से कुरान के साथ भगवद गीता पढ़ने की अपील की और ये बात राजनीतिक गलियारों में आग की तरह फैल गई. भाजपा ने इसे स्वागत योग्य बताया जबकि कांग्रेस ने इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश करार दिया और दोनों पार्टियां आमने-सामने आ गईं. आखिर आईपीएस राजा बाबू सिंह ने क्या कहा था और ये अधिकारी कौन हैं जिनकी बातों से इतना हंगामा मच गया? आइए जानते हैं उनकी पूरी कहानी, करियर और विवाद की पूरी डिटेल्स…
कौन हैं राजा बाबू सिंह?
राजा बाबू सिंह मध्य प्रदेश कैडर के 1994 बैच के IPS अधिकारी हैं जो सख्त प्रशासन और अनुशासनप्रियता के लिए मशहूर हैं. उनका जन्म 11 जुलाई 1967 को उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के पचनेही कस्बे में हुआ था. उन्होंने एमए तक पढ़ाई की और UPSC सिविल सर्विसेज एग्जाम 1993 में क्लियर किया. 6 सितंबर 1994 को उनकी IPS में नियुक्ति हुई. शुरुआती दिनों से ही वो पुलिसिंग में नैतिक मूल्यों और नवाचारों पर जोर देते रहे हैं. वो मानते हैं कि पुलिस का काम सिर्फ कानून लागू करना नहीं, बल्कि समाज में नैतिकता और चरित्र निर्माण भी है.उनका करियर काफी इंप्रेसिव रहा है.2021 में सीमा सुरक्षा बल (BSF)में इंस्पेक्टर जनरल (IG) रहते हुए उन्होंने सीमाओं की सुरक्षा मजबूत की और आंतरिक प्रशासन में सुधार लाए. कश्मीर में ड्यूटी के दौरान भी उन्होंने चुनौतीपूर्ण हालातों में बेहतरीन काम किया. हाल ही में BSF से डेपुटेशन पूरा करके वो मध्य प्रदेश वापस लौटे और ADG (ट्रेनिंग) बने. 2019 में ग्वालियर रेंज के DIG रहते हुए उन्होंने जेलों में कैदियों को गीता की प्रतियां बांटीं ताकि उनमें नैतिक सुधार आए. कुल मिलाकर वो एक ऐसे अधिकारी हैं जो पुलिस ट्रेनिंग को सिर्फ फिजिकल नहीं, बल्कि मेंटल और स्पिरिचुअल लेवल पर ले जाते हैं.
IPS राजा बाबू सिंह ने क्या कहा, जिससे बवाल मचा?
गणतंत्र दिवस पर मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के डोहरा गांव में स्थित मदरसे इस्लामिया मदीनतुल उलूम के छात्रों को राजा बाबू सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबोधित किया. वो मध्य प्रदेश ADG (ट्रेनिंग) है.मदरसे के मौलाना ने उन्हें छात्रों से बातचीत करने का न्योता दिया. सिंह ने छात्रों को शिक्षा पर बधाई दी और कहा कि कुरान के साथ-साथ भगवद गीता का भी अध्ययन करें क्योंकि ये सदियों से ज्ञान देती आ रही है और आपकी जिंदगी की राह रोशन करेगी. उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक सोच और सहिष्णुता पर भी जोर दिया. साथ ही छात्रों से कहा कि भारत एक बड़ा देश है.कश्मीर से कन्याकुमारी तक इसकी एकता और अखंडता बनाए रखना आपका कर्तव्य है.विवाद के बाद राजा बाबू सिंह ने कहा कि मदरसे के मौलाना उनके पुराने दोस्त हैं.
बयान के बाद मच गया बवाल
ये अपील सुनने में साधारण लगती है, लेकिन सोशल मीडिया और राजनीति में तूफान आ गया. भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने इसका जोरदार समर्थन किया. उन्होंने कहा कि जब मदरसों में हिंदू बच्चों को बुलाकर उर्दू पढ़ाया जा सकता है, तो गीता पढ़ने में क्या दिक्कत है? गीता तो मानवता की रक्षा का सबसे बड़ा उदाहरण है.इससे आत्मबल मिलता है.सामाजिक समरसता बढ़ती है और अन्याय से लड़ने की ताकत आती है. ये बयान स्वागत योग्य है,लेकिन कांग्रेस ने इसे सांप्रदायिक बताकर विरोध किया और कहा कि ये धार्मिक स्थानों में हस्तक्षेप है. दोनों पार्टियों के बीच बहस छिड़ गई और ये मामला राजनीतिक घमासान में बदल गया. सोशल मीडिया पर भी लोग बंट गए. कुछ ने इसे सेकुलरिज्म का उल्लंघन कहा तो कुछ ने धार्मिक सद्भाव की मिसाल बताया.
पुलिस ट्रेनिंग में गीता और रामचरितमानस की पहल: क्यों और कैसे?
राजा बाबू सिंह पुलिस ट्रेनिंग में धार्मिक ग्रंथों को शामिल करने के लिए जाने जाते हैं. मध्य प्रदेश के 8 पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में 4,000 से ज्यादा नए कांस्टेबलों की ट्रेनिंग चल रही है और उन्होंने वहां रामचरितमानस और भगवद गीता का नियमित पाठ शुरू कराया. जुलाई में रामचरितमानस का आदेश दिया, क्योंकि कई रंगरूट होमसिक हो रहे थे और घर के पास ट्रांसफर मांग रहे थे. सिंह ने उन्हें प्रभु राम के 14 साल के वनवास का उदाहरण दिया.अगर राम पिता के वचन के लिए इतना सह सकते हैं, तो तुम देश सेवा के लिए 9 महीने की ट्रेनिंग क्यों नहीं? इसने रंगरूटों को प्रेरित किया और अब रामचरितमानस से त्याग, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा सिखाई गई.कृष्ण का प्रिय माह मार्गशीर्ष महीने नवंबर में गीता का पाठ जोड़ा गया. गीता को जीवन का सार मानते हुए सिंह कहते हैं कि ये धैर्य, संतुलन और संयम सिखाती है. पुलिस जैसे तनावपूर्ण काम में ये जरूरी है निष्पक्ष रहकर कर्तव्य निभाना, एकाग्रता बढ़ाना. ये पहल सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि पुलिसकर्मियों को तनावमुक्त और नैतिक रूप से मजबूत बनाने की है. सिंह कहते हैं कि पुलिसिंग शारीरिक और कानूनी ट्रेनिंग से आगे नैतिक मूल्यों से जुड़ी है.
ट्रेनिंग में अन्य नए प्रयोग: साइबर से लेकर मेडिटेशन तक
राजा बाबू सिंह सिर्फ गीता-रामायण तक सीमित नहीं हैं.उनका फोकस समग्र ट्रेनिंग पर है. नए अपराधों से निपटने के लिए साइबर क्राइम और टेक्नोलॉजी पर स्पेशल कोर्स जोड़े गए हैं. तनाव कम करने के लिए हार्टफुलनेस मेडिटेशन को रोजाना रूटीन में शामिल किया. IQ के साथ EQ (इमोशनल इंटेलिजेंस) पर जोर है ताकि जवान भीड़ या मुश्किल हालात में भावनाओं पर काबू रखकर सही फैसले लें. BSF में भी उन्होंने ऐसे प्रयोग किए, जिनसे जवानों का मनोबल बढ़ा. उनका लक्ष्य है कि ट्रेनिंग के बाद जवान न सिर्फ फिट बॉडी वाले हों, बल्कि मजबूत माइंड और नैतिक चरित्र वाले भी हों.