ई-अटेंडेंस के चक्कर में वेतन अटका, नेटवर्क बना सबसे बड़ी बाधा, समस्या कब सुलझेगी?

ई-अटेंडेंस के चक्कर में वेतन अटका, नेटवर्क बना सबसे बड़ी बाधा, समस्या कब सुलझेगी?


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E-Attendance Trouble: बालाघाट के किरनापुर, लांजी, बैहर और परसवाड़ा विकासखंड के दर्जनों गावों में नेटवर्क की समस्या है. ऐसे में लोकल 18 कसंगी, कुआगोंदी सहित कई गांवों तक पहुंचा. कुआगोंदी के प्राथमिक स्कूल के शिक्षक उम्मेदलाल शरणागत ने बताया कि ई-अटेंडेंस के चक्कर में उनकी तनख्वाह अटक गई. लेकिन उन्हें आश्वासन मिला कि जल्द ही उनकी तनख्वाह खाते में आ जाएगी.

E-Attendance Trouble: मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने पारदर्शिता लाने के लिए ई-अटेंडेंस का नियम लेकर आई है. अब शिक्षक एम शिक्षा मित्र ऐप और हमारे शिक्षक पोर्टल पर ऑनलाइन अटेंडेंस लगा रहे है. शुरु में शिक्षकों ने इसे लेकर आपत्ति दर्ज की थी लेकिन बाद में कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ई-अटेंडेंस अनिवार्य कर दी. लेकिन अब कई इलाकों से ई-अटेंडेंस को लेकर शिक्षक शिकायत कर रहे है. कुछ ऐसे ही इलाके बालाघाट जिले में भी जहां पर नेटवर्क न होने से शिक्षकों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है. ई-अटेंडेंस लगवाने को लेकर प्रशासन भी परेशान है. लोकल 18 भी उन इलाकों में पहुंचा जहां पर नेटवर्क ही नहीं है और शिक्षकों से समझने की कोशिश की ई-अटेंडेंस लगाने में क्या समस्या हो रही है.

बालाघाट के दर्जनों गांवों के स्कूल में हो रही समस्या
बालाघाट के किरनापुर, लांजी, बैहर और परसवाड़ा विकासखंड के दर्जनों गावों में नेटवर्क की समस्या है. ऐसे में लोकल 18 कसंगी, कुआगोंदी सहित कई गांवों तक पहुंचा. कुआगोंदी के प्राथमिक स्कूल के शिक्षक उम्मेदलाल शरणागत ने बताया कि ई-अटेंडेंस के चक्कर में उनकी तनख्वाह अटक गई. लेकिन उन्हें आश्वासन मिला कि जल्द ही उनकी तनख्वाह खाते में आ जाएगी. वह स्कूल से करीब 20 किलोमीटर दूर गांगुलपारा के पास अटेंडेंस लगाने की अनुमति दी है.

कोई संकुल से तो कोई स्कूल से दूर लगा रहा ई-अटेंडेंस
बालाघाट के कसंगी गांव में भी यही हाल है. शासकीय माध्यमिक शाला के शिक्षक फुलचंद तुरकर ने बताया कि कभी ई-अटेंडेंस लगती है कभी लगती ही नहीं. नेटवर्क की समस्या है. ऐसे में कई बार वेतन में कटौती होती है. उन्होंने अपने अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी लेकिन उनके लिए अटेंडेंस के लिए स्कूल की लोकेशन से कई किलोमीटर दूर सेट की गई है. ये कहानी सिर्फ एक शिक्षक की नहीं है, दरअसल, इसी इलाके के दर्जन भर से ज्यादा गांवों में ऐसी ही समस्या है.

शिक्षकों के लिए ऐसी व्यवस्था
स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के लिए एम शिक्षा मित्र ऐप और हमारे शिक्षक पोर्टल की व्यवस्था की है. इसमें शिक्षक को स्कूल शुरु होने से 1 घंटे के भीतर शिक्षकों अटेंडेंस लगानी पड़ती है. वहीं, स्कूल छूटने के आधे घंटे बाद तक ई-अटेंडेंस लगाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करवा सकते हैं. इसमें चेहरे की पहचान और जीपीएस बेस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है. इससे पारदर्शिता जरूर आती है लेकिन नो नेटवर्क जोन वाले शिक्षकों के लिए समस्या भी है. ऐसे में जिला प्रशासन ने स्कूल से कई किलोमीटर दूर ई-अटेंडेंस मार्क करने की सुविधा दी. ऐसे में इसका औचित्य ही नहीं रह जाता है.

ई-अटेंडेंस ही नहीं दूसरी भी समस्याएं
लोकल 18 को शिक्षकों ने बताया कि ई-अटेंडेंस के अलावा नेटवर्क न होने से कई समस्याएं हो रही है. दरअसल, अब हर काम डिजिटली होता है. ऐसे में सारे काम करने के लिए कई दूर तक जाना पड़ता है. वहीं, ग्रामीणों को भी बिना नेटवर्क की समस्या तरह-तरह की समस्याएं आती है. लोकल 18 ने इस मामले में किरनापुर विकासखंड के बीईओ गणेश सोनी से बात की. उन्होंने बताया कि शासन के निर्देशानुसार सभी शिक्षकों की ई अटेंडेंस अनिवार्य है. ऐसे में जिन इलाकों में नेटवर्क नहीं है वहां संकुल जाकर शिक्षक ई अटेंडेंस लगा सकते हैं.

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Deepti Sharma

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें

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जहां सिग्नल नहीं, वहां हाजिरी कैसे? ई-अटेंडेंस से जूझते शिक्षक



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