इंदौर में सीएम मोहन यादव का ऐलान, सभी सरकारी अस्पतालों में बनेंगे गर्भ संस्कार कक्ष

इंदौर में सीएम मोहन यादव का ऐलान, सभी सरकारी अस्पतालों में बनेंगे गर्भ संस्कार कक्ष


इंदौर. मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में दिव्य संतान प्रकल्प के कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाले समय में राज्य के सभी शासकीय अस्पतालों में गर्भ संस्कार कक्ष बनाए जाएंगे. इसके साथ ही चिकित्सा विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध कॉलेजों में गर्भ संस्कार के अध्ययन और अध्यापन की विधिवत व्यवस्था की जाएगी. मुख्यमंत्री का यह ऐलान ऐसे समय में आया है, जब मातृत्व स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और भारतीय चिकित्सा परंपराओं को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली से जोड़ने की मांग लगातार उठ रही है. सरकार का मानना है कि गर्भावस्था के दौरान शिशु के शारीरिक विकास के साथ मानसिक और भावनात्मक विकास भी उतना ही जरूरी है, और इसी सोच के तहत यह पहल की जा रही है.

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में परंपरा और विज्ञान कभी अलग-अलग नहीं रहे हैं. सनातन व्यवस्था के 16 संस्कार केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, स्वस्थ और मूल्यवान बनाने की वैज्ञानिक पद्धति हैं. गर्भ में पल रहे शिशु को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से संस्कारित करना ही गर्भ संस्कार का मूल उद्देश्य है. सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि इस व्यवस्था को केवल विचार तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे सरकारी स्वास्थ्य ढांचे और मेडिकल एजुकेशन सिस्टम का हिस्सा बनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि इससे संबंधित गजट नोटिफिकेशन भी जल्द जारी किया जाएगा, ताकि इसे नीति स्तर पर लागू किया जा सके.

शासकीय अस्पतालों में गर्भ संस्कार कक्ष क्यों अहम
मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृत्व केवल एक जैविक प्रक्रिया नहीं है. गर्भ शरीर निर्माण के साथ संस्कार की पहली पाठशाला भी है. आधुनिक विज्ञान भी यह मानता है कि गर्भावस्था के पांच से छह महीने के बाद शिशु पर मां की भावनाओं, मानसिक स्थिति और आसपास के वातावरण का प्रभाव पड़ता है. ऐसे में गर्भ संस्कार कक्ष का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को सकारात्मक, शांत और संतुलित वातावरण उपलब्ध कराना है.

मेडिकल शिक्षा में भी शामिल होगा गर्भ संस्कार
सीएम डॉ. मोहन यादव ने साफ किया कि यह पहल केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेगी. चिकित्सा विश्वविद्यालयों और उनसे जुड़े महाविद्यालयों में गर्भ संस्कार के अध्ययन और अध्यापन की व्यवस्था की जाएगी. इससे भविष्य के डॉक्टरों को भारतीय चिकित्सा परंपरा, आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान के समन्वय की बेहतर समझ मिल सकेगी.

आयुर्वेद, विज्ञान और सनातन परंपरा का समन्वय
मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुर्वेद की सामर्थ्य सर्वविदित है. कोविड काल में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक प्रक्रियाओं को अपनाया गया. आयुर्वेद में गर्भ संस्कार के महत्व को पहले से स्वीकार किया गया है और अब आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी इसे मान्यता दे रहा है. उन्होंने महाभारत में अभिमन्यु का उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे पूर्वज मानसिक और भावनात्मक विकास की गहरी समझ रखते थे.

कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने क्या कहा
अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य भय्याजी जोशी ने कहा कि भारत का चिंतन दुनिया को संचालित करने का नहीं, बल्कि मार्गदर्शन करने का है. उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ मनुष्य का निर्माण केवल शिक्षा या भौतिक संपदा से नहीं, बल्कि सुशिक्षा और सुसंस्कार से संभव है. उन्होंने युवाओं और दंपत्तियों से आग्रह किया कि शास्त्रों के मूल्यों को आचरण में उतारें. विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय मातृ स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक चिकित्सा प्रणाली से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है. इससे गर्भवती महिलाओं को बेहतर वातावरण मिलेगा और भविष्य की पीढ़ी के सर्वांगीण विकास पर सकारात्मक असर पड़ेगा.



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