लाजवाब स्वाद, एक बार बनने के बाद 6 महीने तक रह सकता है सुरक्षित; जानें शानदार रेसिपी

लाजवाब स्वाद, एक बार बनने के बाद 6 महीने तक रह सकता है सुरक्षित; जानें शानदार रेसिपी


शिवपुरी जिले में जब सर्दियों का मौसम दस्तक देता है, तो घर-घर में एक खास खुशबू फैलने लगती है. यह खुशबू होती है देसी खुरमे की, जो पीढ़ियों से यहां की परंपरा का हिस्सा रहा है. शादियों, पारिवारिक आयोजनों, त्योहारों और मेहमान नवाजी में शिवपुरी का देसी खुरमा खास पहचान रखता है. गुड़, घी और आटे से तैयार होने वाला यह खुरमा स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है.

बड़े बर्तनों में गूंथा जाता है आटा
खुरमा बनाने की परंपरा गांवों में आज भी पूरी तरह देसी तरीके से निभाई जाती है. महिलाएं एक साथ बैठकर बड़े बर्तनों में आटा गूंथती हैं, लोइयां बनाती हैं और उन्हें बड़ी रोटी की तरह बेलकर मनपसंद आकार में काटती हैं. इसके बाद लकड़ी के चूल्हे पर कढ़ाही चढ़ाकर धीमी आंच में खुरमे तले जाते हैं. यही धीमी आंच और देसी तरीका इसके स्वाद और टिकाऊपन की सबसे बड़ी वजह है.

खुरमा बनाने में गेहूं का आटा, थोड़ी से सूजी और तिल्ली गुड़ या चीनी, मोयन के लिए देसी घी या रिफाइंड का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें किसी भी तरह का केमिकल या प्रिजरवेटिव नहीं मिलाया जाता, फिर भी यह लंबे समय तक खराब नहीं होता. पूरी तरह ठंडा होने के बाद खुरमे को बड़े डिब्बों या मिट्टी के बर्तनों में भरकर सुरक्षित रखा जाता है.

क्या हैं खुरमा खाने के फायदे
ठंड के मौसम में खुरमे के फायदे भी कम नहीं हैं. गुड़ शरीर को गर्मी देता है और ठंड से बचाव करता है. देसी घी शरीर में ऊर्जा बढ़ाता है और कमजोर इम्युनिटी को मजबूत करता है. सौंफ और इलायची पाचन को बेहतर बनाती हैं, जिससे सर्दियों में होने वाली गैस और अपच की समस्या नहीं होती. यही वजह है कि बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक खुरमा शौक से खाते हैं.

चार से 6 महीने तक सुरक्षित रह सकता है खुरमा
सबसे खास बात यह है कि अगर खुरमा सही तरीके से बनाया और रखा जाए, तो इसे 4 से 6 महीने तक आराम से सुरक्षित रखा जा सकता है। कई घरों में तो दीपावली या शादी के समय बना खुरमा पूरे सर्दी के मौसम में चलता है। जरूरत पड़ने पर इसे दूध या चाय के साथ भी खाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और बढ़ जाता है।

भले ही बाजार में तरह-तरह की मिठाइयां उपलब्ध हों, लेकिन शिवपुरी का देसी खुरमा आज भी अपनी सादगी, स्वाद और सेहत के कारण खास बना हुआ है. यह सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि गांव-घर की परंपरा, अपनापन और देसी स्वाद की पहचान बनते है.



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