Sidhi News: मध्य प्रदेश का सीधी जिला मूक-बधिर नागरिकों को न्याय की मुख्यधारा से जोड़ने में देशभर के लिए मिसाल बन गया है. सीधी अब देश का पहला ऐसा जिला बन गया, जहां के सभी थानों और पुलिस चौकियों में साइन लैंग्वेज आधारित QR कोड सिस्टम लागू किया जा रहा है. इस अभिनव पहल से मूक-बधिर नागरिक बिना किसी दुभाषिये के सीधे पुलिस और प्रशासन तक अपनी बात पहुंचा सकेंगे, जिससे उन्हें त्वरित न्याय मिल सकेगा.
ज्ञानेंद्र पुरोहित ने बताया कि जब कोई मूक-बधिर व्यक्ति सीधी जिले के किसी भी थाने या पुलिस चौकी में पहुंचेगा, तो वहां लगाए गए QR कोड को अपने मोबाइल फोन से स्कैन करेगा. QR कोड स्कैन करते ही वह सीधे बेंगलुरु स्थित कॉल सेंटर से वीडियो कॉल के माध्यम से जुड़ जाएगा. कॉल सेंटर में मौजूद प्रशिक्षित वालंटियर उस व्यक्ति की साइन लैंग्वेज को समझकर उसे सामान्य भाषा में अनुवाद करेंगे और उसकी पूरी बात संबंधित थाना प्रभारी या पुलिस स्टाफ तक पहुंचाएंगे. इससे शिकायत दर्ज कराने, आवेदन देने या किसी भी तरह की सहायता लेने में मूक-बधिर नागरिकों को परेशानी नहीं होगी.
कंपनी संग MoU साइन
इस तकनीक को मध्य प्रदेश में लागू करने के लिए संबंधित कंपनी और मध्य प्रदेश शासन के बीच एमओयू (MoU) किया गया है. इस समझौते के तहत कंपनी तकनीकी सहयोग, सॉफ्टवेयर सपोर्ट, कॉल सेंटर संचालन और साइन लैंग्वेज अनुवाद की संपूर्ण जिम्मेदारी निभा रही है. यह सुविधा चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेगी, जिससे आपात स्थिति में भी मूक-बधिर नागरिकों को तत्काल मदद मिल सके.
पुलिस कर्मियों को भी ट्रेनिंग
इस अभिनव पहल को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए आनंद सर्विस सोसायटी के सचिव ज्ञानेंद्र पुरोहित के नेतृत्व में सीधी पुलिस अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया. प्रशिक्षण कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक संतोष कोरी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अरविंद श्रीवास्तव, सभी एसडीओपी, थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी शामिल हुए. प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को मूक-बधिरों से संवेदनशील व्यवहार, साइन लैंग्वेज तकनीक के उपयोग और पूरी प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी गई.
देश का पहला जिला, जहां ये सुविधा
ज्ञानेंद्र पुरोहित ने बताया कि देश में यह पहला अवसर है, जब किसी जिले के सभी थानों में एक साथ मूक-बधिरों के लिए साइन लैंग्वेज आधारित सुविधा लागू की जा रही है. इससे पहले ऐसी योजनाएं बनीं, लेकिन वे कागजों तक ही सीमित रह गईं. सीधी जिले की यह पहल मूक-बधिर नागरिकों के अधिकार, सम्मान और न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है.