मऊगंज जिले के हर्रहा गांव में अवैध खनन का मामला सामने आया है। यहां जिस जमीन पर खनन की जांच करने अधिकारी पहुंचे, उन्हें यह स्पष्ट नहीं था कि जमीन किसकी है और जांच किसके खिलाफ की जानी है। इससे अवैध खनन करने वालों के हौसले बुलंद हैं। हर्रहा गांव में खसरा नंबर 8/12 और 8/13 की जमीन पर वर्षों से अवैध खनन जारी है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, बिना किसी वैध लीज के 50 फीट से अधिक गहरी खाइयां खोद दी गई हैं। इस अवैध खनन के कारण आदिवासी परिवार पलायन को मजबूर हो रहे हैं। कई घरों और सरकारी स्कूलों में दरारें आ चुकी हैं, जिससे ग्रामीणों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि छह महीने पहले जब खनन लगभग 30 प्रतिशत था, तब भी इसकी शिकायतें की गई थीं। हालांकि, उस समय कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रही, और अब खनन 80 प्रतिशत तक पहुंच गया है। पीड़िता ललिता मौर्या ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि उनके पति की मौत के बाद उनकी डेढ़ एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया। शुरुआत में उन्हें किराया दिया गया, लेकिन बाद में भुगतान बंद कर दिया गया। उनकी जमीन इतनी क्षतिग्रस्त हो चुकी है कि अब उस पर खेती करना संभव नहीं है। उन्होंने प्रशासन से अपनी जमीन वापस दिलाने, समतलीकरण कराने और मुआवजे की मांग की है। यह मामला न्यायालय और मीडिया तक पहुंचने के बाद राजस्व और खनिज विभाग की एक संयुक्त टीम मौके पर जांच के लिए पहुंची। प्रभारी खनिज अधिकारी सुनीत राजपूत ने बताया कि “जांच के बाद ही पता चलेगा कि जमीन किसकी है।” मौके पर खनन में इस्तेमाल होने वाली मशीनें और पत्थरों का स्टॉक मिलने की पुष्टि हुई है। हालांकि, इस मामले में अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, और ग्रामीण आगे की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
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