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Agriculture News: वरिष्ठ कृषि अधिकारी संजय सिंह ने लोकल 18 से कहा कि किसान NPK खाद का पर्णीय छिड़काव कर सकते हैं. इसके लिए एक लीटर पानी में 2 ग्राम जिंक, 2 ग्राम बोरान और 10 ग्राम NPK मिलाकर घोल तैयार कर लें और फिर फसल पर इसका छिड़काव करें.
सीधी. मध्य प्रदेश में दलहनी फसल चने की खेती ज्यादा मात्रा में की जाती है. इस समय चने की फसल अपने सबसे संवेदनशील चरण में पहुंच रही है. खेतों में पौधों पर फूल आना शुरू हो गया है और कुछ ही दिनों में फलियां बनने लगेंगी. यह अवस्था चने की पैदावार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. इसी कारण किसान इन दिनों फसल की सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित रहते हैं. सीधी के वरिष्ठ कृषि अधिकारी संजय सिंह ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि यदि किसान एक बार सिंचाई कर चुके हैं, तो दोबारा सिंचाई करने से बचें. चना कम पानी की खपत वाली फसल है और इस समय रात में पड़ने वाली हल्की ओस से ही पौधों की पानी की जरूरत काफी हद तक पूरी हो जाती है. सामान्य मिट्टी वाले खेतों में इस अवस्था पर सिंचाई करना नुकसानदायक हो सकता है, जिससे जड़ सड़न और उत्पादन में गिरावट की आशंका रहती है. हालांकि जिन किसानों ने बलुई मिट्टी में चने की खेती की है, वे जरूरत पड़ने पर स्प्रिंकलर से हल्का छिड़काव कर सकते हैं.
फसल को मजबूत बनाने और बेहतर फलन के लिए पोषक तत्वों की पूर्ति भी जरूरी है. संजय सिंह के अनुसार, किसान एनपीके खाद का पर्णीय छिड़काव कर सकते हैं. इसके लिए प्रति लीटर पानी में 10 ग्राम एनपीके, 2 ग्राम जिंक और 2 ग्राम बोरान मिलाकर घोल तैयार करें और फसल पर छिड़काव करें. इससे पौधों में परागण की क्षमता बढ़ेगी और फलियां बेहतर तरीके से विकसित होंगी.
फूल आने के बाद बढ़ जाता है खतरा
फूल आने के कुछ ही दिनों बाद चने में फली छेदक कीट का खतरा बढ़ जाता है. फिलहाल मौसम अनुकूल है, ऐसे में रोकथाम के लिए किसान नीम आधारित कीटनाशक का उपयोग कर सकते हैं. 1500 पीपीएम नीम तेल को 5 मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है. इसके बाद इमामेक्टिन बेंजोएट 10 ग्राम को 15 लीटर पानी में मिलाकर दो बार छिड़काव करने से फलछेदक कीट का प्रकोप नहीं होता. यदि फसल में सूखने के लक्षण दिखें, तो प्रोपिकोनाजोल 250 मिली प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करने से सूखाड़ की समस्या से राहत मिलती है.
कीट का प्रकोप बढ़ जाए तो…
उन्होंने बताया कि यदि सभी उपायों के बाद भी फली छेदक कीट का प्रकोप अधिक हो जाए, तो इमामेक्टिन बेंजोएट आधा ग्राम प्रति लीटर पानी या क्लोरेंट्रानिलिप्रोल आधा मिली प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव किया जा सकता है. नियमित निगरानी और समय पर उपचार से किसान फसल को नुकसान से बचाकर अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.