कनाड़िया भूमि विवाद में हाईकोर्ट ने जताई आपत्ति: 100 करोड़ से अधिक की जमीन पर समझौते के प्रयासों पर सवाल; सीनियर एडवोकेट ने पैरवी से किया इनकार – Indore News

कनाड़िया भूमि विवाद में हाईकोर्ट ने जताई आपत्ति:  100 करोड़ से अधिक की जमीन पर समझौते के प्रयासों पर सवाल; सीनियर एडवोकेट ने पैरवी से किया इनकार – Indore News




इंदौर के चर्चित पार्वतीबाई कनाड़िया भूमि विवाद में भू-माफिया की कथित साजिश से जुड़े आरोपों के बीच अब न्यायालयीन स्तर पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कई दशकों से विभिन्न न्यायालयों में लंबित यह मामला फिलहाल इंदौर हाईकोर्ट में दूसरी अपील के रूप में विचाराधीन है। इसमें 100 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की बहुमूल्य भूमि का विवाद सामने आया है। हाईकोर्ट के समक्ष सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट डॉ. विवेक पांडेय और उनके सहयोगियों ने कोर्ट को अवगत कराया कि वे अपीलकर्ता के आचरण से नाराज हैं और अब इस प्रकरण में पैरवी जारी नहीं रखना चाहते। उन्होंने विभिन्न आधारों पर खुद को इस मामले से अग करने की अनुमति मांगी। कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए उनका वकालतनामा वापस लेने की इजाजत दे दी। जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी के समक्ष यह तथ्य भी सामने आया कि प्रकरण में अपील वापस लेने के लिए दो अलग-अलग आवेदन प्रस्तुत किए हैं। पहले आवेदन में कुछ शर्तों के साथ अपील वापस लेकर मामले को साक्ष्य के लिए पुनः निचली अदालत भेजने की मांग की गई थी, जबकि बाद में दायर आवेदन में समझौते के आधार पर अपील वापस लेने का अनुरोध किया गया। दोनों आवेदनों की सामग्री एक-दूसरे से भिन्न पाए जाने पर हाईकोर्ट ने असंतोष व्यक्त किया। कोर्ट ने यह भी माना कि इस विवाद में राज्य सरकार एक आवश्यक पक्षकार है। इंटरविनर की ओर से दलील दी गई कि उक्त भूमि में राज्य शासन का महत्वपूर्ण हित निहित है। इसे ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य शासन को निर्देश दिए हैं कि वह दोनों आवेदनों पर चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करे। इसके पश्चात मामले की अगली सुनवाई तय की जाएगी। यह है पूरा मामला यह विवाद इंदौर बायपास स्थित फीनिक्स मॉल के पीछे कनाड़िया तहसील के खसरा नंबर 44 की तीन हेक्टेयर से अधिक भूमि से जुड़ा है। पूर्व में मृत पार्वतीबाई के कई कथित वारिसों ने इस भूमि पर दावा किया था। हालांकि तहसीलदार ने सभी दावों को अविश्वसनीय मानते हुए खारिज कर दिया था और रजिस्ट्रार को भूमि के किसी भी प्रकार के हस्तांतरण पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। आरोप है कि राजस्व स्तर पर राहत नहीं मिलने के बाद भू-माफिया ने दीवानी न्यायालयों के माध्यम से समझौते की डिग्रियां हासिल करने का प्रयास किया। अब इसी तरह का प्रयास हाईकोर्ट स्तर पर भी किया जा रहा था। इसी बीच एक पक्ष द्वारा कलेक्टर के समक्ष ट्रस्ट के नाम पर भूमि आवंटन का आवेदन प्रस्तुत किया है, जबकि दूसरे पक्ष ने जनहित याचिका दायर कर उक्त भूमि को लावारिस घोषित कर शासन द्वारा अधिग्रहण की मांग की है।



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