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any hope for bangladesh: बांग्लादेश के लिए आईसीसी के सामने ‘धोखाधड़ी’ की बात रखना एक कूटनीतिक दबाव तो बना सकता है, लेकिन वर्ल्ड कप के बीच में दोबारा खेलने का मौका मिलना नियमों की किताब से बाहर की बात है.
क्या पाकिस्तान के खिलाफ जाकर बांग्लादेश कर सकता है आईसीसी से दोबारा खेलने की सिफारिश
नई दिल्ली. क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है, जहाँ कभी पिच पर गेंद घूमती है तो कभी मैदान के बाहर राजनीति और समीकरण. हाल के समय में बांग्लादेशी क्रिकेट प्रेमियों के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार की खेल संबंधी ‘धोखाधड़ी’ या तकनीकी विवाद के बाद बांग्लादेश टी20 वर्ल्ड कप में दोबारा अपनी जगह मांग सकता है. आईसीसी की मेज पर नियम भावनाओं से अधिक मजबूत होते हैं, लेकिन क्या क्रिकेट के गलियारों में बांग्लादेश के लिए कोई ‘चोर दरवाजा’ या ‘प्रमोशन’ का रास्ता खुला है?
क्रिकेट के मैदान पर हार का बदला केवल अगले मैच में जीत से ही लिया जा सकता है. बांग्लादेश के लिए आईसीसी के सामने ‘धोखाधड़ी’ की बात रखना एक कूटनीतिक दबाव तो बना सकता है, लेकिन वर्ल्ड कप के बीच में दोबारा खेलने का मौका मिलना नियमों की किताब से बाहर की बात है. यदि वे आईसीसी के मंच पर अपनी आवाज मजबूती से उठाते हैं उसके बाद भी अब कुछ होने की संभावना ना के बराबर है.
क्या दोबारा खेलने की मांग संभव है?
आईसीसी के नियमों के अनुसार, एक बार टूर्नामेंट का शेड्यूल तय हो जाने और मैच के परिणाम आधिकारिक रूप से घोषित हो जाने के बाद, उसे बदलना लगभग असंभव होता है. इतिहास गवाह है कि आईसीसी शायद ही कभी किसी मैच को दोबारा आयोजित करने का निर्णय लेती है. अब क्योंकि स्कॉटलैंड को न्योता जा चुका है इसलिए, वर्ल्ड कप में ‘दोबारा खेलने’ की बात रखना व्यावहारिक रूप से बहुत कठिन है.
2. आईसीसी ‘प्रमोशन’ और बांग्लादेश की स्थिति
‘प्रमोशन’ शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर एसोसिएट देशों (जैसे नेपाल या अमेरिका) के लिए किया जाता है जो मुख्य रैंकिंग में ऊपर आना चाहते हैं. बांग्लादेश पहले से ही एक ‘पूर्ण सदस्य’ राष्ट्र है. यदि बांग्लादेश आईसीसी के सामने यह साबित कर देता है कि उनके साथ अन्याय हुआ है, तो आईसीसी उन्हें अगले टूर्नामेंट के लिए ‘डायरेक्ट क्वालिफिकेशन’ या ‘हायर सीडिंग’ देकर एक प्रकार का ‘प्रमोशन’ या राहत दे सकती है.
3. क्या कोई कानूनी या तकनीकी रास्ता है?
यदि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) को लगता है कि उनके साथ बड़े स्तर पर ‘धोखा’ हुआ है, तो वे निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं वो आईसीसी की कार्यकारी समिति के सामने साक्ष्य पेश कर सकते है. यदि कोई विवाद द्विपक्षीय सीरीज के दौरान हुआ है, तो आईसीसी हर्जाने के तौर पर एक्स्ट्रा पॉइंट्स या सीरीज के पुनर्गठन का आदेश दे सकती है. बहुत गंभीर मामलों में मामला ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट’ तक जा सकता है, हालांकि क्रिकेट में ऐसा कम ही देखा गया है. वैसे क्रिकेट में न्याय की उम्मीद हमेशा रहती है, पर बांग्लादेश के लिए फिलहाल इतना ही कहा जा सकता है कि अब पश्चताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत