स्कूल में 40 स्टूडेंट्स, एक टीचर और चपरासी पांच… अजब एमपी के गजब कारनामे तो देखिए

स्कूल में 40 स्टूडेंट्स, एक टीचर और चपरासी पांच… अजब एमपी के गजब कारनामे तो देखिए


Rewa School Ground Report: मध्य प्रदेश में शिक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कहती है. ताजा मामला रीवा शहर का है, जहां नगर निगम के स्वागत भवन के पास संचालित कन्या हाई स्कूल बदहाली की मिसाल बन चुका है. शहर के बीचों-बीच मौजूद इस स्कूल में पढ़ाई की हालत इतनी खराब है कि बच्चों का भविष्य भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है.

शिक्षक नदारद, चपरासी संभाल रहे क्लास
स्कूल में पढ़ाने के लिए नियमित शिक्षक मौजूद ही नहीं हैं. हालात ऐसे बन चुके हैं कि छात्रों को चपरासी पढ़ाने को मजबूर हैं. स्कूल में इस समय सिर्फ एक शिक्षक पदस्थ हैं, जो आने वाले एक-दो महीने में रिटायर होने वाले हैं. जानकारी के मुताबिक वे भी बीते दो महीनों से स्कूल नहीं आ रहे. पहले किसी तरह अतिथि शिक्षकों के सहारे काम चल जाता था, लेकिन इस साल अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति भी नहीं की गई.

1965 में शुरू हुआ स्कूल, अब बदहाली की कगार पर
इस कन्या हाई स्कूल की शुरुआत साल 1965 में प्राइमरी स्कूल के रूप में हुई थी. बाद में मिडिल स्कूल और फिर 1980 में इसे हाई स्कूल का दर्जा मिला. एक समय यहां पहली से दसवीं तक करीब 300 छात्राएं पढ़ती थीं, लेकिन शिक्षकों की कमी और बदहाल व्यवस्था के चलते अब यह संख्या घटकर 40 के आसपास सिमट गई है. इनमें से भी रोजाना केवल 10 से 15 छात्राएं ही स्कूल पहुंचती हैं.

पढ़ाई नहीं, अव्यवस्था का माहौल
छात्रों की संख्या घटने के साथ स्कूल की हालत भी लगातार बिगड़ती चली गई. ज्यादातर कक्षाएं बंद पड़ी हैं, जिनमें धूल की मोटी परत जम चुकी है. कई कमरों को स्टोर रूम बना दिया गया है. शौचालयों की नियमित सफाई नहीं होती और पूरे स्कूल परिसर में कचरे का अंबार लगा हुआ है. ऐसे माहौल में बच्चों का स्कूल आना भी अभिभावकों को जोखिम भरा लगने लगा है.

छात्राएं छोड़ रही स्कूल, अभिभावक परेशान
स्कूल की इस हालत से छात्राएं और उनके अभिभावक बेहद नाराज़ हैं. कई छात्राओं ने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी है. अभिभावकों का कहना है कि जब न शिक्षक हैं, न साफ-सफाई और न ही पढ़ाई का माहौल, तो बच्चों को स्कूल भेजने का कोई मतलब नहीं रह जाता.

प्रशासन की अनदेखी, भविष्य पर सवाल
शहर के बीच स्थित नगर निगम के स्कूल की यह स्थिति प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करती है. बेटियों की शिक्षा को लेकर योजनाएं और भाषण तो बहुत होते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है. अगर समय रहते जिम्मेदार विभागों ने ध्यान नहीं दिया, तो यह स्कूल सिर्फ एक इमारत बनकर रह जाएगा और कई बेटियों का भविष्य अंधेरे में चला जाएगा.



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