पुलिस पंचायत में संपत्ति और पारिवारिक विवाद निपटे: बुजुर्ग महिला को पति की प्रॉपर्टी में मिला हिस्सा, उधारी का पैसा लौटाने पर भी सहमति – Vidisha News

पुलिस पंचायत में संपत्ति और पारिवारिक विवाद निपटे:  बुजुर्ग महिला को पति की प्रॉपर्टी में मिला हिस्सा, उधारी का पैसा लौटाने पर भी सहमति – Vidisha News




पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी के मार्गदर्शन में गठित पुलिस पंचायत की साप्ताहिक बैठक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में उधारी, संपत्ति विवाद और परिवारिक विवाद सुलझाए गए। 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला को संपत्ति विवाद में न्याय मिला बैठक में एक 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने अपनी समस्या रखी। उन्होंने बताया कि पति की मृत्यु के बाद उन्हें न तो पारिवारिक पेंशन मिल रही है और न ही पति की संपत्ति पर उनका अधिकार तय हो पाया है। सुनवाई के दौरान सामने आया कि मृतक ने दूसरी महिला से विधिवत विवाह किया था, जो संपत्ति में नॉमिनी के रूप में दर्ज थी। उम्र, कमजोरी और सामाजिक परिस्थितियों के कारण बुजुर्ग महिला अपने अधिकारों के लिए संघर्ष नहीं कर पा रही थीं। पुलिस पंचायत ने संवेदनशीलता के साथ विचार करते हुए सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि भोपाल और सिरोंज स्थित दो मकानों में से एक मकान बुजुर्ग महिला को और दूसरा मकान दूसरी महिला को दिया जाएगा। इस फैसले से संतुष्ट होकर बुजुर्ग महिला और उनके पुत्र-पुत्रियों ने पुलिस पंचायत का आभार जताया और इसे उनके जीवन की बड़ी राहत बताया। बुजुर्ग दंपत्ति और बेटे-बहू के बीच सुलह एक अन्य मामले में मिठास क्षेत्र से आए बुजुर्ग दंपत्ति ने शिकायत की कि उनका पुत्र और बहू उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। पुलिस पंचायत ने दोनों पक्षों की बात ध्यान से सुनी और उन्हें पारिवारिक मूल्यों, संवाद और आपसी सम्मान के बारे में समझाइश दी। बैठक में सहमति बनी कि भविष्य में कोई अपशब्दों का प्रयोग नहीं करेगा और किसी भी विवाद की स्थिति में तथ्यों को लिखित रूप में रखा जाएगा। समाधान के बाद पुत्र और बहू ने बुजुर्गों के चरण स्पर्श किए और मिठाई खिलाई, जिससे आपसी सुलह हो गई और सकारात्मक माहौल बना। ₹50 हजार उधारी के मामले में किस्तों में भुगतान पर सहमति सिरोंज निवासी एक वरिष्ठ नागरिक ने शिकायत की कि उन्होंने ₹50,000 की राशि उधार दी थी, जो न्यायालय में राजीनामा होने के बावजूद वापस नहीं मिल रही है। पुलिस पंचायत ने स्पष्ट किया कि न्यायालयीन आदेश का पालन करना सभी का दायित्व है। मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए आवेदक ने ₹3,000 प्रतिमाह की किस्त स्वीकार की। वहीं अनावेदक ने सुरक्षा के तौर पर पूरी राशि के बराबर का चेक देने और नियमित भुगतान करने की सहमति दी। अन्य मामलों की भी हुई सुनवाई इसके अलावा अन्य प्रकरणों की भी सुनवाई की गई। कुछ मामलों में पक्षकारों की अनुपस्थिति के कारण अगली तिथि तय की गई।



Source link